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World Cancer Day: धूम्रपान न करने वालों में भी बढ़ रहे फेफड़ों के कैंसर के मामले, वायु प्रदूषण प्रमुख कारण

वर्ल्ड कैंसर डे पर यह दिखाया गया कि धूम्रपान न करने वालों में भी फेफड़ों का कैंसर बढ़ रहा है, और इसके मुख्य कारण वायु प्रदूषण और हानिकारक प्रदूषक तत्व हैं.

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Anvi Shukla

हर साल 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है, ताकि लोगों में इस खतरनाक बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके. फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण है. साल 2025 में वर्ल्ड कैंसर डे की थीम "यूनाइटेड बाय यूनिक" है. इस थीम का मतलब है कि कैंसर के खिलाफ हम सब को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा, ताकि इसे जड़ से खत्म किया जा सके.

आमतौर पर यह माना जाता है कि फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से धूम्रपान करने वालों में होता है, लेकिन हाल के आंकड़े इस धारणा को चुनौती दे रहे हैं. अब धूम्रपान न करने वाले लोग भी इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं, और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण वायु प्रदूषण है.

विशेषज्ञों के अनुसार, वायु प्रदूषण में पाए जाने वाले हानिकारक तत्व जैसे कि पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5), कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड फेफड़ों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं. इन प्रदूषकों का लगातार शरीर में प्रवेश फेफड़ों में सूजन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. भारत जैसे देशों में, जहां वायु प्रदूषण अत्यधिक है, फेफड़ों के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, यहां तक कि उन लोगों में भी जो कभी धूम्रपान नहीं करते.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों में कैंसर, दिल की बीमारी और श्वसन संबंधी समस्याएं प्रमुख हैं. यह समस्या केवल बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी बढ़ रही है, जहां कृषि में जलावन के लिए पराली जलाने जैसी गतिविधियां होती हैं.

इसलिए, वर्ल्ड कैंसर डे पर यह संदेश देना जरूरी है कि हमें वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए गंभीर कदम उठाने होंगे, ताकि हम इस बढ़ती हुई समस्या से निपट सकें और कैंसर जैसे खतरनाक रोगों से बच सकें.

(इस खबर को इंडिया डेली लाइव की टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की हुई है)