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कैसी है राजकुमार राव और सान्या मल्होत्रा की 'टोस्टर'? देखने से पहले फटाफट पढ़ें रिव्यू

टोस्टर जैसी मामूली चीज को लेकर इतनी उलझन वाली कहानी बनाना क्रिएटिव आइडिया है. लेकिन बीच में कहानी कुछ हद तक भटक जाती है और कुछ सीन अनावश्यक लगते हैं. अगर स्क्रिप्ट को थोड़ा और टाइट रखा जाता तो फिल्म और बेहतर हो सकती थी. कुल मिलाकर 'टोस्टर' परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन यह आपको एंटरटेन जरूर करती है.

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Edited By: Antima Pal
कैसी है राजकुमार राव और सान्या मल्होत्रा की 'टोस्टर'? देखने से पहले फटाफट पढ़ें रिव्यू
Courtesy: x

मुंबई: नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई राजकुमार राव और सान्या मल्होत्रा की फिल्म 'टोस्टर' इन दिनों चर्चा में है. एक साधारण से टोस्टर को लेकर बनी यह डार्क कॉमेडी शुरू में आपको हंसाती है, लेकिन बीच में कहानी थोड़ी भटक जाती है. फिर भी राजकुमार राव की अदाकारी और फिल्म का अनोखा आइडिया इसे देखने लायक बनाता है.

फिल्म की कहानी रामकांत (राजकुमार राव) पर आधारित है, जो बेहद कंजूस और हिसाब-किताब रखने वाला आदमी है. वह हर खर्चे का हिसाब रखता है और यहां तक कि गिफ्ट दिए हुए सामान को भी वापस मांगने से नहीं हिचकिचाता. शादी में दिए गए टोस्टर को जब उस जोड़े का तलाक हो जाता है, तो रामकांत फैसला कर लेता है कि वह टोस्टर वापस ले आएगा. यहीं से शुरू होती है फिल्म की मजेदार लेकिन पागलपन भरी यात्रा.

एक साधारण सी चीज टोस्टर अचानक एक मर्डर से जुड़ जाती है. घबराया हुआ रामकांत उसे अपनी लैंडलेडी के घर छिपा देता है, लेकिन जल्द ही लैंडलेडी की मौत हो जाती है. अब टोस्टर सिर्फ रामकांत का नहीं, कई और लोगों का भी टारगेट बन जाता है. एक के बाद एक अजीब घटनाएं होती रहती हैं और सब कुछ गड़बड़ होने लगता है. फिल्म हल्के-फुल्के अंदाज में शुरू होती है और आप सहजता से कहानी से जुड़ जाते हैं.

परफॉर्मेंस की बात करें तो राजकुमार राव फिर एक बार कमाल कर गए हैं. कंजूस, जिद्दी और थोड़े अजीब रामकांत का किरदार निभाते हुए वे पूरी तरह डूब गए हैं. उनका कॉमिक टाइमिंग और बॉडी लैंग्वेज देखने लायक है. सान्या मल्होत्रा भी अच्छी हैं, लेकिन उनका रोल काफी सीमित है. दर्शक उनसे ज्यादा कुछ उम्मीद करते हैं. 

अर्चना पुरन सिंह और सीमा पाहवा अपने छोटे रोल्स में अपना चार्म लेकर आती हैं. खास तौर पर अभिषेक बनर्जी का ऑफबीट रोल एक बार फिर ध्यान खींचता है. पूरी कास्ट अच्छा काम करती है, लेकिन कुछ कलाकारों को ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिल पाया. डायरेक्शन और स्क्रिप्ट की बात करें तो फिल्म की शुरुआत बहुत तरोताजा और मजेदार है.

टोस्टर जैसी मामूली चीज को लेकर इतनी उलझन वाली कहानी बनाना क्रिएटिव आइडिया है. लेकिन बीच में कहानी कुछ हद तक भटक जाती है और कुछ सीन अनावश्यक लगते हैं. अगर स्क्रिप्ट को थोड़ा और टाइट रखा जाता तो फिल्म और बेहतर हो सकती थी. कुल मिलाकर 'टोस्टर' परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन यह आपको एंटरटेन जरूर करती है. हल्की-फुल्की हंसी, थोड़ा सस्पेंस और राजकुमार राव की शानदार परफॉर्मेंस के साथ यह वीकेंड पर एक बार देखी जा सकती है.