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Manoj Bajpayee Career: जब तबाह हो रहा था मनोज बाजपेयी का करियर, नीम करोली बाबा की शरण में जाते ही हुआ 'चमत्कार', एक्टर का खुलासा

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हाल ही में अपनी नई फिल्म 'जुग्नुमा - द फेबल' को लेकर एक चौंकाने वाली बात शेयर की है. उन्होंने बताया कि कैसे उत्तराखंड के कैंची धाम, जो बाबा नीम करोली का प्रसिद्ध आश्रम है, ने उनके करियर को नई दिशा दी.

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Antima Pal

Manoj Bajpayee Career: बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हाल ही में अपनी नई फिल्म 'जुग्नुमा - द फेबल' को लेकर एक चौंकाने वाली बात शेयर की है. उन्होंने बताया कि कैसे उत्तराखंड के कैंची धाम, जो बाबा नीम करोली का प्रसिद्ध आश्रम है, ने उनके करियर को नई दिशा दी. एक इंटरव्यू में मनोज ने कहा कि वे एक बेचैन दौर से गुजर रहे थे, जब उन्हें लगा कि शायद उनका एक्टिंग का सफर खत्म हो गया है. लेकिन इस आध्यात्मिक यात्रा ने सब कुछ बदल दिया.

यह कहानी 'जुग्नुमा' के डायरेक्टर राम रेड्डी के साथ जुड़ी हुई है. फिल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले दोनों ने लोकेशन पर सीधे जाने के बजाय कैंची धाम को चुना, जो हिमालय की गोद में बसा एक शांत स्थान है. मनोज ने बताया, 'हम बाबाजी की गुफा गए. वहां एक घंटे की चढ़ाई के बाद ध्यान किया. अचानक कुछ जादुई हुआ. मुझे लगा जैसे सारी उलझनें सुलझ गईं.' उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वे एक साल तक बिना काम के रहे थे, ठीक 'द फैमिली मैन' के पहले सीजन से पहले. दोस्त चिंतित थे, लेकिन पत्नी शबाना रजा ही समझ पाईं.

जब तबाह हो रहा था मनोज बाजपेयी का करियर

मनोज ने कहा कि वहां उन्हें वैराग्य, मुक्ति और शांति का पाठ मिला. 'जितना लगाव, उतनी परेशानी, छोड़ना ही आजादी है.' उन्होंने फिल्म के किरदार से जोड़ते हुए कहा. राम रेड्डी ने भी माना कि यह जगह फिल्म को जन्म देने वाली साबित हुई. मनोज ने राम को अपना शिष्य, अभिनेता और बड़ा भाई बताया, लेकिन सच्चाई यह है कि कैंची धाम ने ही 'जुग्नुमा' को आकार दिया.

नीम करोली बाबा की शरण में जाते ही हुआ 'चमत्कार'

'जुग्नुमा' 1980 के दशक के अंत में हिमालय की पृष्ठभूमि पर बनी है. यह मैजिकल रियलिज्म से भरी कहानी है, जो पीढ़ीगत आघात, वर्ग भेद, अंधविश्वास और रहस्यवाद जैसे विषयों को छूती है. मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं, जहां वे देव नामक एक व्यक्ति का किरदार निभाते हैं, जिसका शांत जीवन अचानक बागानों में लगी आग से उथल-पुथल हो जाता है. फिल्म में दीपक डोब्रियाल, प्रियंका बोस, हीरल सिद्धू, अवान पूकोट और तिलोत्तमा शोमे जैसे कलाकार भी हैं. फिल्म पहले बर्लिनाले, लीड्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और मुंबई के मामी फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई, जहां सराहना मिली. पिछले हफ्ते सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म को दर्शक पसंद कर रहे हैं.