कौन थे देश के पहले आईपीएस अधिकारी? जानें कितनी थी उनकी पहली तनख्वाह?

आज जब आईपीएस अधिकारी लाखों रुपये की सैलरी पाते हैं, तब उनके समय की शुरुआती तनख्वाह मात्र 400 रुपये प्रतिमाह थी. उस दौर में यह राशि सम्मानजनक मानी जाती थी. सी.वी. नरसिम्हन का जन्म 21 मई 1915 को मद्रास में हुआ था. बचपन से ही वे मेधावी छात्र थे. उनकी प्रारंभिक शिक्षा तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज में हुई. 

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आजादी के बाद भारत में पुलिस व्यवस्था को नई दिशा देने वाली भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की शुरुआत 1948 में हुई. इस सेवा के पहले बैच के सबसे वरिष्ठ और देश के पहले आईपीएस अधिकारी माने जाते हैं चक्रवर्ती विजयराघव नरसिम्हन (सी.वी. नरसिम्हन). उन्होंने स्वतंत्र भारत की पुलिस सेवा की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई. 

कितनी थी देश के पहले IPS ऑफिसर की पहली तनख्वाह?

आज जब आईपीएस अधिकारी लाखों रुपये की सैलरी पाते हैं, तब उनके समय की शुरुआती तनख्वाह मात्र 400 रुपये प्रतिमाह थी. उस दौर में यह राशि सम्मानजनक मानी जाती थी. सी.वी. नरसिम्हन का जन्म 21 मई 1915 को मद्रास में हुआ था. बचपन से ही वे मेधावी छात्र थे. उनकी प्रारंभिक शिक्षा तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज में हुई. 

विदेश जाकर पढ़ाई की

इसके बाद उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से स्नातक किया और फिर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की. उस समय विदेश जाकर पढ़ाई करना बहुत कम लोगों के बस की बात होती थी. विदेशी शिक्षा ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया और उन्हें नई सोच दी. 1948 में जब स्वतंत्र भारत में पहली बार आईपीएस भर्ती परीक्षा हुई, तो नरसिम्हन ने इसे टॉप किया.

उन्होंने आईपीएस को चुना, जबकि उनके पास आईएएस जैसी अन्य सेवाओं का विकल्प भी था. उनका मानना था कि पुलिस सेवा में रहकर वे समाज की बेहतरी के लिए ज्यादा काम कर सकते हैं. शुरू में वे असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस के पद पर नियुक्त हुए. उनकी पहली सैलरी करीब 400 रुपये महीना थी. आज के मुकाबले यह राशि बहुत कम लगती है, लेकिन उस समय महंगाई कम होने और जिम्मेदारियों को देखते हुए यह ठीक-ठाक मानी जाती थी.

नरसिम्हन ने अपनी सेवा को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का माध्यम बनाया. उन्होंने तमिलनाडु पुलिस में विभिन्न पदों पर काम किया और अंत में डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) के पद तक पहुंचे. उन्होंने सीबीआई के निदेशक के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. 1974 में वे गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनने वाले पहले आईपीएस अधिकारी बने, जो पहले केवल आईएएस अधिकारियों के लिए आरक्षित होता था. उनकी ईमानदारी, मेहनत और समर्पण के लिए उन्हें कई सम्मान मिले. 

1962 में उन्हें पुलिस मेडल, 1971 में राष्ट्रपति पुलिस पदक और वर्ष 2001 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया. इसके अलावा उन्होंने महाभारत का अंग्रेजी में अनुवाद भी किया, जो उनकी साहित्यिक रुचि को दर्शाता है. सी.वी. नरसिम्हन 2 नवंबर 2003 को 88 वर्ष की आयु में चेन्नई में इस दुनिया से विदा हो गए.