West Bengal Assembly Election 2026 Assembly Election 2026

WPI Data November 2024: थोक महंगाई दर हुई धड़ाम, तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंची

WPI से मिली  जानकारी के मुताबिक थोक महंगाई में कमी आई है, ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अब खुदरा मूल्य में भी गिरावट हो सकती है. इसका सीधा असर सब्जी और फलों समेत खाद्य वस्तुओं पर पड़ने वाला है.

x
Kamal Kumar Mishra

WPI Data November 2024: नवंबर में Wholesale Price Index (WPI) आधारित इन्फ्लेशन कम होकर 1.89 प्रतिशत पर आ गया, जो अक्टूबर में 2.36 प्रतिशत था. सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली है. आंकड़ों के अनुसार खाद्य वस्तुओं की थोक कीमतें कम होने से थोक महंगाई दर में नरमी आई है.

कॉमर्स एवं इंडस्ट्री मंत्रालय ने एक बयान में कहा, " ऑल इंडिया Wholesale Price Index (WPI) संख्या के आधार पर इन्फ्लेशन की वार्षिक दर नवंबर 2024 में नवंबर 2023 की तुलना में 1.89 फीसदी है." सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं, विशेषकर सब्जियों की कीमतों में गिरावट के कारण नवंबर महीने में मुद्रास्फीति घटकर 1.89 प्रतिशत रह गई, जो अक्टूबर में 2.36 प्रतिशत थी.

इस तरह कम-ज्यादा हुए रेट

दरअसल, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारितमुद्रा स्फीति सितंबर 2024 में 1.84 प्रतिशत थी. आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति अक्टूबर में 11.59 प्रतिशत के मुकाबले 8.92 प्रतिशत रही. प्राथमिक वस्तुओं की मुद्रास्फीति 8.09 प्रतिशत के मुकाबले 5.49 प्रतिशत रही.

इन वस्तुओं के घटे दाम

नवंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतों में 3.1% की गिरावट आई, जो कि मुद्रास्फीति के कुल आंकड़ों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है. विशेष रूप से, सब्जियों, दालों, और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे मुद्रास्फीति पर दबाव कम हुआ है. हालांकि, ईंधन और ऊर्जा के क्षेत्र में कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट ने समग्र मुद्रास्फीति पर सकारात्मक प्रभाव डाला है.

जानकारों ने कहा संतोषजनक

WPI मुद्रास्फीति के इस आंकड़े को विशेषज्ञों द्वारा संतोषजनक माना गया है, क्योंकि यह भारत सरकार के मौद्रिक और आर्थिक नीति उद्देश्यों के अनुरूप है. उम्मीद जताई जा रही है कि अगले महीनों में मुद्रास्फीति और भी नियंत्रित हो सकती है, अगर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार होता है.