साल 2025 अब समाप्ति की ओर है और देश की निगाहें नए साल के साथ आने वाले केंद्रीय बजट पर टिकी हैं. आमतौर पर एक फरवरी को पेश होने वाला बजट इस बार चर्चा में है, क्योंकि 2026 में यह तारीख रविवार को पड़ रही है. ऐसे में सरकार के सामने यह सवाल है कि परंपरा निभाई जाए या तारीख बदली जाए. यही वजह है कि बजट की तारीख को लेकर सस्पेंस बना हुआ है.
भारत में एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करने की परंपरा वर्ष 2017 से शुरू हुई थी. तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह व्यवस्था लागू की, ताकि बजट के प्रस्तावों को नए वित्तीय वर्ष से पहले लागू किया जा सके. इसके बाद से लगातार बजट एक फरवरी को ही पेश होता रहा है.
वर्ष 2026 में एक फरवरी रविवार को पड़ रहा है. यही कारण है कि बजट की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है. रविवार को आमतौर पर संसद, सरकारी दफ्तर और शेयर बाजार बंद रहते हैं. ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि बजट उसी दिन पेश होगा या नहीं.
यह पहली बार नहीं है जब बजट की तारीख पर चर्चा हो रही हो. वर्ष 1999 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने 28 फरवरी को रविवार के दिन बजट पेश किया था. उस समय बजट शाम के बजाय सुबह 11 बजे रखा गया था, जो अपने आप में एक बदलाव था.
इस बार एक फरवरी को संत रविदास जयंती भी है, जिसके चलते कई राज्यों में अवकाश रहता है. ऐसे में सरकार के सामने यह व्यावहारिक चुनौती है कि बजट प्रस्तुति को किस दिन रखा जाए, ताकि सभी औपचारिक प्रक्रियाएं सुचारू रूप से पूरी हो सकें.
सूत्रों के मुताबिक, बजट की तारीख पर अंतिम निर्णय संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति लेगी. संभावना है कि बजट 31 जनवरी शनिवार या फिर 2 फरवरी सोमवार को पेश किया जाए. हालांकि, सरकार परंपरा निभाते हुए रविवार को भी बजट पेश कर सकती है.