अब पेट्रोल नहीं, एथेनॉल से दौड़ेंगी गाड़ियां! ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी; बचेंगे देश के अरबों रुपये

कच्चे तेल का आयात घटाने के लिए सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने का ड्राफ्ट जारी किया है. अब E100 मानक तक का रास्ता साफ होगा जिससे प्रदूषण कम होगा और अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: भारत अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए विदेशी तेल के बजाय स्वदेशी एथेनॉल पर दांव लगा रहा है. सड़क परिवहन मंत्रालय के नए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन ने भविष्य की 'फ्लेक्स-फ्यूल' गाड़ियों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं. पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने के बाद, अब सरकार का लक्ष्य इसे शत-प्रतिशत तक ले जाना है. यह कदम न केवल पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि महंगे पेट्रोल से राहत दिलाते हुए देश के अरबों रुपये के विदेशी मुद्रा भंडार को भी बचाएगा.

मंत्रालय ने 27 अप्रैल को मोटर वाहन अधिनियम के तहत जो ड्राफ्ट जारी किया है, उसका मुख्य उद्देश्य 'सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989' में संशोधन करना है. इसमें ईंधन के वर्गीकरण और 'हाई एथेनॉल ब्लेंड' से जुड़े तकनीकी मानकों को शामिल किया गया है. अब वाहनों के लिए E85 और E100 जैसे मानकों को भी जगह दी गई है, जिसका मतलब है कि आने वाले समय में गाड़ियां पूरी तरह से एथेनॉल पर आधारित ईंधन से चल सकेंगी.

आयात पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य 

पिछले साल अप्रैल में देश भर में E20 ईंधन यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को अनिवार्य रूप से लागू किया गया था. अब सरकार का ध्यान पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को बड़े स्तर पर कम करने पर है. यदि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ती है, तो देश को विदेशों से कच्चा तेल खरीदने की जरूरत कम होगी. इससे न केवल करोड़ों रुपये की बचत होगी, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिलेगी.

पीएम मोदी ने गिनाए एथेनॉल के फायदे 

हाल ही में बजट सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में एथेनॉल ब्लेंडिंग की सफलता पर चर्चा की थी. उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने 1-2 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने की उपलब्धि हासिल की है. इस नीति की वजह से भारत सालाना लगभग साढ़े चार करोड़ बैरल पेट्रोल के आयात को कम करने में सफल रहा है. यह आंकड़ा दर्शाता है कि एथेनॉल देश के लिए कितना महत्वपूर्ण हो गया है.

पारंपारिक ईंधन का खत्म होता भविष्य 

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी वाहन निर्माता कंपनियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि पेट्रोल और डीजल जैसे पारंपारिक ईंधनों का भविष्य अब समाप्त होने वाला है. उन्होंने कंपनियों से अपील की है कि वे अपनी तकनीक को बायोफ्यूल और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा की तरफ मोड़ें. गडकरी के अनुसार, पेट्रोल-डीजल न केवल महंगे हैं, बल्कि ये पर्यावरण और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए एक बड़ी समस्या बन चुके हैं, जिसका समाधान वैकल्पिक ईंधन ही है.