भारत के दूसरे नंबर के अमीर और दिग्गज उद्योगपित गौतम अडानी और सात अन्य लोगों के खिलाफ अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट ने धोखाधडी और रिश्वत के आरोप लगे हैं.अडानी समूह के द्वारा इन आरोपों पर प्रतिक्रिया दी गई है. उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया है, जिसमें कहा गया कि है भारत में सरकारी कॉन्ट्रेक्ट हासिल करने के लिए 2200 करोड़ की रिश्वत दी. उन्होंने कहा कि फेडरल कोर्ट द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं.
अडानी समूह ने एक बयान जारी कर कहा,"अमेरिकी न्याय विभाग और अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग ने अडानी ग्रीन के निदेशकों पर आरोप लगाए हैं. वो निराधार हैं और हम उसका खंडन करते हैं." न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में गौतम अडानी व अन्य लोगों पर आरोप लगाए है कि ये सभी सोलर एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए भारतीय अधिकारियों को 2100 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की योजना का हिस्सा हैं . इस केस में आठ लोगों का नाम लिया गया है, जिसमें गौतम अदाणी और उनके कुछ रिश्तेदारों का भी नाम है.
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— Adani Group (@AdaniOnline) November 21, 2024
'यूस डिपॉर्टमेंट ऑफ जस्टिस ने खुद निर्दोष माना'
इस पूरे मामले पर टिप्पणी करते हुए अडानी ग्रूप के प्रवक्ता ने कहा कि यूस डिपॉर्टमेंट ऑफ जस्टिस ने खुद माना है कि केस में लगाए गए आरोप केवल आरोप हैं. ऐसे में अभियुक्तों को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि उन्हें कोर्ट से दोषी साबित नहीं कर दिया जाता है.
प्रवक्ता ने आगे कहा कि अडानी ग्रुप हमेशा से उच्चतम स्तर का सुशासन,पारदर्शिता और नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है. हम अपने सभी हितधारकों, साझेदारों और कर्मचारियों को यह भरोसा दिलाते हैं कि हम कानून का पालन करने वाला संगठन हैं. हम निर्धारित सभी नियमों का पूरी तरह से पालन करते हैं.
गौतम अडानी पर क्या हैं आरोप?
गौतम अडानी पर आरोप है कि रिश्वत की साजिश के लिए गौतम अडानी ने कई मौकों पर भारतीय अधिकारियों से व्यक्तिगत मुलाकात की. उनके अलावा अन्य सहआरोपियों भी इनसे व्यक्तिगत रूप से मिले और इसे अंजाम देने के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक मैसेजिंग ऐप के माध्यम से चर्चा की. इसमें अमेरिका में रहना भी शामिल है. इन पर आरोप है कि इन लोगों ने रिश्वत के पैसों को जुटाने के लिए अमेरिका के निवेशकों, विदेशी निवेशकों और बैंकों से झूठ बोला.