नई दिल्ली: दुनिया की नजरें इस समय ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण युद्ध और उससे उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट पर टिकी हैं. लेकिन इस रणनीतिक उथल-पुथल के पीछे चीन एक बहुत बड़ी आर्थिक बाजी खेल रहा है. सोने के बाद अब चीन ने चांदी की बंपर खरीदारी शुरू कर दी है, जिसने वैश्विक बाजार को हैरान कर दिया है. युद्ध की वजह से सप्लाई चेन रुकने के डर और बढ़ती औद्योगिक मांग ने चीन को चांदी का सबसे बड़ा खरीदार बना दिया है.
चीन ने मार्च 2026 में 836 टन चांदी का आयात किया है, जो पिछले महीने की तुलना में 78 प्रतिशत ज्यादा है. यह आंकड़ा पिछले दस सालों के औसत सीजनल इंपोर्ट से 178 गुना अधिक है. अगर साल 2026 के शुरुआती महीनों की बात करें, तो चीन अब तक कुल 1626 टन चांदी खरीद चुका है. ये असाधारण आंकड़े वैश्विक बाजार के विश्लेषकों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं और कई सवाल खड़े कर रहे हैं.
सोने की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद निवेशकों ने अब चांदी को सुरक्षित विकल्प के रूप में देखना शुरू कर दिया है. सोना आम निवेशकों की पहुंच से बाहर होने लगा है, जिसके कारण वे कम कीमत और आसान उपलब्धता वाली चांदी की ओर रुख कर रहे हैं. जो बड़े निवेशक पहले केवल सोने पर भरोसा करते थे, वे भी अब चांदी में अपना पोर्टफोलियो बढ़ा रहे हैं. इससे चांदी की रिटेल डिमांड में जबरदस्त तेजी आई है.
चांदी की इस भारी मांग के पीछे सिर्फ निवेश ही नहीं, बल्कि चीन का बढ़ता सोलर सेक्टर भी है. चीन की सोलर कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के लिए चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही हैं. युद्ध के कारण भविष्य में कच्चा माल न मिलने के डर से इन कंपनियों ने स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है. वे सप्लाई चेन में किसी भी संभावित रुकावट से बचने के लिए अभी से आयात बढ़ा रही हैं.
चीन की इस एकतरफा खरीदारी ने दुनियाभर में चांदी की सप्लाई पर भारी दबाव बना दिया है. मांग तो उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ रही है, लेकिन खनन और उत्पादन की रफ्तार उसके मुकाबले बहुत धीमी है. मांग और सप्लाई के बीच बढ़ती यह खाई कीमतों में भारी उछाल ला सकती है. वैश्विक स्तर पर हो रही इस उथल-पुथल का असर जल्द ही अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगेगा.
वैश्विक बाजार में चांदी की बढ़ती मांग का सीधा असर भारत के घरेलू बाजार पर पड़ना तय है. भारत में चांदी की कीमत पहले ही 2,50,513 रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुकी है. चीन की इस भारी खरीदारी और ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने चांदी की कीमतों पर जबरदस्त दबाव बना दिया है. आने वाले समय में भारतीय उपभोक्ताओं को चांदी के लिए और अधिक जेब ढीली करनी पड़ सकती है.