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बाथरूम में रखी ये 5 चीजें बना सकती हैं आपको कंगाल, छिन जाती हैं घर की खुशियां!

वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम सिर्फ नहाने की जगह नहीं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को बाहर करने का स्थान है. इसलिए यहां की छोटी-सी गलती भी घर की सकारात्मक ऊर्जा, धन, स्वास्थ्य और रिश्तों पर बुरा असर डाल सकती है.

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Princy Sharma

नई दिल्ली:  वास्तु शास्त्र में बाथरूम को केवल नहाने की जगह नहीं, बल्कि घर की नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालने वाला स्थान माना गया है. ऐसे में यहां की गई एक छोटी-सी गलती भी पूरे घर की सकारात्मक ऊर्जा को कमजोर कर सकती है और धन, स्वास्थ्य और रिश्तों पर बुरा प्रभाव डाल सकती है. वास्तु विशेषज्ञ मानते हैं कि बाथरूम में कुछ चीजें बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ये बेहद अशुभ मानी जाती हैं और जीवन में परेशानियां बढ़ा सकती हैं.

कांटेदार पौधा

सबसे पहले बात करते हैं पौधों की. बाथरूम में कैक्टस, गुड़हल या किसी भी तरह का कांटेदार पौधा रखना बेहद अशुभ माना जाता है. ऐसे पौधे तनाव, परिवार में झगड़े और बच्चों की पढ़ाई में बाधाएं पैदा कर सकते हैं. इसलिए किसी भी कांटे वाले पौधे को न बाथरूम में रखें और न ही घर के अंदर.

टूटा हुआ आईना 

अब बात करते हैं शीशे की. अगर बाथरूम का आईना टूटा हुआ, धुंधला या क्रैक वाला है, तो यह घर की समृद्धि और रिश्तों की स्थिरता पर बुरा असर डालता है. टूटा हुआ शीशा नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और लक्ष्मी के घर में ठहराव को कम करता है. इसलिए बाथरूम का शीशा हमेशा साफ, चमकदार और बिल्कुल सही हालत में होना चाहिए.

पुरानी या धुंधली तस्वीरें

कुछ लोग बाथरूम में पुरानी या धुंधली तस्वीरें, विशेष रूप से मृत परिजनों की फोटो रख देते हैं, जो वास्तु के अनुसार बहुत ही गलत माना जाता है. इससे घर में कर्ज, बीमारी और मानसिक तनाव की ऊर्जा एक्टिव हो जाती है. ऐसी चीजें कभी भी बाथरूम जैसे स्थान पर नहीं रखनी चाहिए.

टूटी हुई पूजा की वस्तुएं

इसके साथ ही कई लोग टूटी हुई पूजा की वस्तुएं जैसे पुरानी माला, टूटा अगरबत्ती स्टैंड या भगवान की टूटी मूर्तियां बाथरूम में रख देते हैं. यह मां लक्ष्मी का अपमान माना जाता है और इससे घर में लगातार आर्थिक समस्याएं बढ़ सकती हैं.

गहरे रंग की बाल्टी

अंत में, बाथरूम में काले या बहुत गहरे नीले रंग की बाल्टी, मग या तौलिए रखना भी अशुभ माना जाता है. वास्तु के अनुसार, ऐसे रंग राहु-केतु और शनि की भारी ऊर्जा को सक्रिय कर देते हैं, जिससे मन भारी होने लगता है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.