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सीता नवमी 2026 पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें क्या है पूजा विधि

सीता नवमी 25 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन माता सीता की पूजा, व्रत और रामायण पाठ का विशेष महत्व है. गुस्सा, बहस, मांसाहार और अशुद्धता से बचना चाहिए.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
सीता नवमी 2026 पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें क्या है पूजा विधि
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में देवी सीता को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है. वह मिथिला के राजा जनक की पुत्री और भगवान राम की दिव्य अर्धांगिनी हैं. हर साल सीता नवमी का त्योहार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन को सीता जयंती या जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है और इसे देवी सीता के जन्मदिवस के रूप में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.

हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सीता नवमी शनिवार 25 अप्रैल को मनाई जाएगी. नवमी तिथि यानी नौवां चंद्र दिवस आज 24 अप्रैल को सुबह 7:21 बजे शुरू हुआ और 25 अप्रैल को सुबह 6:27 बजे तक जारी रहेगी.

इस दिन किन बातों का रखें ध्यान?

  • सीता नवमी का दिन पवित्रता और सकारात्मकता से जुड़ा है. इसलिए, कुछ विशेष बातों पर ध्यान देना जरूरी है.
  • इस दिन गुस्सा करने बहस करने या किसी के बारे में नकारात्मक विचार रखने से बचें.
  • अपने घर आने वाले मेहमानों या किसी अन्य व्यक्ति के साथ रूखा या अपमानजनक व्यवहार न करें.
  • तामसिक चीजों जैसे मांसाहारी भोजन और शराब का सेवन करने से सख्ती से बचें.
  • अपने घर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखें, क्योंकि माना जाता है कि देवी सीता को सफाई बहुत पसंद है. 

पूजा में क्या-क्या चढ़ावें?

पूजा के दौरान, देवी सीता को पीले फल, गुड़ और घर पर बनी मिठाइयों का भोग लगाया जा सकता है. तुलसी के पत्ते चढ़ाना भी बहुत शुभ माना जाता है. गाय के घी का दीपक जलाना न भूलें.

इस दिन और क्या करें?

अपने वैवाहिक जीवन में सुख और तालमेल बनाए रखने के लिए, देवी सीता को 'सोलह श्रृंगार' अर्पित करें और एक लाल चुनरी चढ़ाएं. 'जानकी स्तुति', 'जानकी चालीसा' और 'रामायण' का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है.

इस दिन छोटी कन्याओं को भोजन कराना भी एक पुण्य का काम माना जाता है और इससे माता सीता का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

सीता नवमी का क्या है महत्व?

माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में सीता नवमी को मनाया जाता है. उन्हें त्याग, धैर्य और पवित्रता की साक्षात मूर्ति के रूप में पूजा जाता है. इस दिन उनकी पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है. विशेष रूप से वैवाहिक जीवन में तालमेल और मधुरता बढ़ती है.