IPL 2026

महिला से मतुआ तक..., ममता के गढ़ में बीजेपी बहुमत की ओर; 5 'M' ने बदल दिया पूरा खेल

पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी शुरुआती रुझानों में बढ़त बनाए हुए है. महिला, मुस्लिम, प्रवासी, मतुआ वोट और मजबूत संगठन को बीजेपी की बढ़त के बड़े कारण माना जा रहा है.

Pinterest
Km Jaya

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है. शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी 160 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए नजर आ रही है, जो बहुमत के आंकड़े 148 से काफी आगे है. वहीं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस 100 सीटों के आंकड़े तक पहुंचने के लिए संघर्ष करती दिख रही है.

करीब 15 साल पहले ममता बनर्जी ने 34 साल पुराने वाम शासन को 'मां, माटी, मानुष' के नारे के दम पर खत्म किया था. यह नारा टीएमसी की लगातार तीन जीतों की बड़ी ताकत बना लेकिन 2026 चुनाव में पांच नए 'M' ने बंगाल की राजनीति का समीकरण बदल दिया. जिसमें मुस्लिम, महिला, प्रवासी, मतुआ समुदाय और भारतीय जनता पार्टी की चुनावी मशीनरी जो ममता बनर्जी की जीत की राह में चुनौती खड़ी करते दिखे.

पहला बड़ा फैक्टर

पहला बड़ा फैक्टर महिला वोटर रहे. टीएमसी लंबे समय से महिलाओं के लिए लक्ष्मी भंडार और कन्याश्री जैसी योजनाओं के जरिए मजबूत पकड़ बनाए हुए थी लेकिन इस बार बीजेपी ने भी महिलाओं को लेकर बड़े वादे किए. RG कर मेडिकल कॉलेज में रेप-मर्डर केस भी बड़ा चुनावी मुद्दा बना.

दूसरा अहम फैक्टर

दूसरा अहम फैक्टर मुस्लिम वोट रहा. बंगाल में करीब 27 प्रतिशत मुस्लिम आबादी चुनाव नतीजों पर बड़ा असर डालती है. मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे इलाकों में विकास और वोटर लिस्ट को लेकर नाराजगी की खबरें सामने आईं.

तीसरा फैक्टर

तीसरा बड़ा फैक्टर प्रवासी मतदाता रहे. वोटर लिस्ट से नाम कटने के डर से बड़ी संख्या में प्रवासी कामगार बंगाल लौटे, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया.

चौथा फैक्टर

चौथा फैक्टर मतुआ समुदाय रहा. बंगाल की करीब 17 प्रतिशत आबादी वाले इस समुदाय को बीजेपी का मजबूत समर्थन आधार माना जाता है. उनका वोट इस चुनाव में बेहद अहम साबित हो सकता है.

पांचवां और सबसे अहम फैक्टर

पांचवां और सबसे अहम फैक्टर बीजेपी की मजबूत चुनावी मशीनरी रही. नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने बूथ स्तर तक संगठन मजबूत किया, डिजिटल कैंपेन चलाया और जमीनी नेटवर्क को बढ़ाया. अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं तो बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.