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जानें क्यों दिया था प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी को मृत्युदंड?

भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त भगवान हनुमान है. वे अतुलित बलशाली और बुद्धिमान हैं. एक बार उनके प्रभु श्रीराम को ही उन्हें मृत्युदंड देना पड़ गया था.

India Daily Live

चैत्र माह की पूर्णिमा 23 अप्रैल को है और इस दिन हनुमान जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. भगवान हनुमान प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त हैं और प्रभु श्रीराम भी उन्हें अपने भाई भरत के समान प्रेम करते हैं,लेकिन एक बार प्रभु श्रीराम को हनुमान जी को मृत्युदंड देना पड़ गया था. 

जब प्रभु श्रीराम ने रावण का वध करके लंका पर विजय हासिल कर ली थी, तब वे लंका का राज्य विभीषण को देकर वापस अयोध्या आ गए थे. अयोध्या पहुंचने पर प्रभु श्रीराम का राजतिलक किया गया था. जब वे राजा बन गए तो एक बार दरबार स्थगित हुआ तो नारद मुनि ने गुरु विश्वामित्र का छोड़कर सभी ऋषियों का अभिवादन करने के लिए हनुमान जी से कहा और उनको ये विश्वास दिलाया कि मुनि विश्वामित्र का अभिवादन आपको नहीं करना चाहिए. 

इस पर हनुमान जी ने नारद जी की बात मान ली और विश्वामित्र का अभिवादन नहीं किया. हालांकि विश्वामित्र का इसका प्रभाव नहीं पड़ा, लेकिन नारद जी ने ऋषि विश्वामित्र का इतना अधिक भड़काया कि वे सीधा श्रीराम के पास गए और हनुमान जी को मृत्युदंड देने की आज्ञा दी. गुरु की आज्ञा को मानते हुए श्रीराम को हनुमान जी को मृत्युदंड देना पड़ा था. इसपर उन्होंने हनुमान जी पर दंड देने के लिए बाण चलाया, लेकिन वे राम नाम का जप कर रहे थे, इस कारण प्रभु श्रीराम के बाणों का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. राम मंत्र की शक्ति ने ब्रह्मास्त्र तक को विफल कर दिया. यह देखकर नारद जी ऋषि विश्वामित्र के पास गए और अपनी गलती स्वीकार की  व हनुमान जी की अग्नि परीक्षा का रुकवा दिया. 

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