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पिता की तेरहवीं के बाद थामा स्टेयरिंग, आज परिवार का सहारा बनी उत्तराखंड की सानिया; पहाड़ों की सड़कों पर दौड़ा रही टैक्सी

उत्तराखंड के पौड़ी जिले की सानिया राणा ने पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां संभालते हुए टैक्सी चलाना शुरू किया. आज वह पहाड़ी क्षेत्रों में आत्मविश्वास के साथ वाहन चलाकर महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
पिता की तेरहवीं के बाद थामा स्टेयरिंग, आज परिवार का सहारा बनी उत्तराखंड की सानिया; पहाड़ों की सड़कों पर दौड़ा रही टैक्सी
Courtesy: social media

उत्तराखंड की पहाड़ियों से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो साहस, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता का उदाहरण पेश करती है. पौड़ी जिले के चौबट्टाखाल क्षेत्र के गिंवली गांव की रहने वाली सानिया राणा ने मुश्किल परिस्थितियों में हार मानने के बजाय परिवार का सहारा बनने का फैसला किया. पिता के निधन के बाद उन्होंने उनके काम को आगे बढ़ाया और टैक्सी चालक के रूप में नई पहचान बनाई. आज वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं, बल्कि समाज की सोच भी बदल रही हैं.

पिता का सपना बना जीवन का रास्ता

सानिया राणा के पिता कमलेश सिंह राणा टैक्सी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे. उनकी इच्छा थी कि बेटी भी बेटे की तरह वाहन चलाना सीखे और अपने पैरों पर खड़ी हो. इसी सोच के साथ सानिया ने कम उम्र में ही ड्राइविंग सीखना शुरू कर दिया. वयस्क होने के बाद उन्होंने व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा लिया. उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यही हुनर आगे चलकर उनके परिवार के लिए सबसे बड़ा सहारा बनेगा. पिता की सीख और विश्वास ने सानिया को आत्मनिर्भर बनने की दिशा दिखाई.

तेरहवीं के बाद संभाल लिया स्टेयरिंग

इस वर्ष जनवरी में पिता की गंभीर बीमारी का पता चलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. फरवरी में उनके निधन के बाद घर की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई. ऐसे समय में सानिया ने हिम्मत दिखाई और पिता की तेरहवीं के बाद उनकी टैक्सी का स्टेयरिंग अपने हाथ में ले लिया. उन्होंने बिना किसी झिझक के सड़कों पर उतरकर काम शुरू किया. आज वह चौबट्टाखाल, सतपुली और नौगांवखाल समेत कई क्षेत्रों में नियमित रूप से सवारियां लेकर जाती हैं और जरूरत पड़ने पर कोटद्वार तथा देहरादून तक भी सफर करती हैं.

परिवार की ताकत बनी सानिया

सानिया स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं. उनकी इच्छा कंप्यूटर कोर्स करने की थी, लेकिन पिता ने उन्हें समझाया था कि जब घर में ही रोजगार का अवसर मौजूद है तो उसे मजबूत बनाना चाहिए. उन्होंने पिता की इस बात को गंभीरता से लिया और ड्राइविंग को ही अपना पेशा बना लिया. परिवार में उनकी मां, भाई, बहन और भाभी हैं। पिता द्वारा वाहन के लिए लिया गया ऋण भी अब सानिया चुका रही हैं. भाई के साथ मिलकर वह घर की आर्थिक जिम्मेदारियां संभाल रही हैं और यह साबित कर रही हैं कि दृढ़ निश्चय के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती.