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'नए साल के जश्न के दौरान खुद अपनी सुरक्षा के जिम्मेदार...', नैनीताल पुलिस के फरमान से होटल कारोबारियों के उड़े होश

नैनीताल में नए साल की रात सुरक्षा को लेकर पुलिस के आदेशों ने बहस छेड़ दी है. होटल मालिकों को बाउंसर रखने और आयोजन की पूरी जिम्मेदारी लेने को कहा गया है, जिससे पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.

Gemini AI
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: नए साल का जश्न आते ही पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ उमड़ती है. उत्तराखंड का नैनीताल भी इससे अछूता नहीं रहता. हर साल 31 दिसंबर की रात यहां हजारों सैलानी पहुंचते हैं. ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन और पुलिस की अहम भूमिका होती है. लेकिन इस बार नैनीताल पुलिस के एक फैसले ने नई बहस को जन्म दे दिया है. होटल कारोबारियों से सीधे तौर पर सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने को कहे जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

नए साल पर नैनीताल की बढ़ती भीड़

नैनीताल लंबे समय से नए साल के जश्न का प्रमुख केंद्र रहा है. 31 दिसंबर की रात शहर के होटल, क्लब और रेस्टोरेंट खचाखच भरे रहते हैं. सड़कों पर देर रात तक आवाजाही बनी रहती है. इस भारी भीड़ को देखते हुए हर साल सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाते हैं. आमतौर पर पुलिस अतिरिक्त फोर्स तैनात करती है और ट्रैफिक व कानून व्यवस्था पर नजर रखती है.

पुलिस का नया फरमान

इस बार नैनीताल पुलिस ने अलग कदम उठाया है. पुलिस ने सभी होटल मालिकों को निर्देश जारी कर कहा है कि 31 दिसंबर की रात अपने होटलों में होने वाले आयोजनों के दौरान बाउंसर रखना अनिवार्य होगा. साथ ही हर होटल को अपने कार्यक्रम की पूरी जानकारी स्थानीय थाने में पहले से देनी होगी. यह आदेश पहली बार इस तरह लागू किया गया है.

एसपी ने क्या कहा?

सिटी नैनीताल के एसपी मनोज कत्याल ने कहा कि होटल मालिकों को यह बताना होगा कि उनके यहां कितने लोग आएंगे, कार्यक्रम किस तरह का होगा और सुरक्षा की व्यवस्था कैसे की जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि यदि किसी आयोजन के दौरान कोई घटना होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी आयोजक की होगी. निर्देशों का पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.

होटल कारोबारियों की नाराजगी

नैनीताल होटल एसोसिएशन के सचिव वेद साह ने पुलिस के आदेश पर असहजता जताई है. उन्होंने कहा कि नए साल पर भीड़ हर साल रहती है, लेकिन पहले कभी इस तरह के निर्देश जारी नहीं किए गए. उनका कहना है कि कई होटल पहले से ही निजी सुरक्षा रखते हैं, लेकिन पुलिस का यह आदेश कारोबारियों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है. पर्यटन से जुड़े लोग इसे पुलिस द्वारा जिम्मेदारी डालने के रूप में देख रहे हैं.

पुलिस की भूमिका पर उठते सवाल

इस आदेश के बाद कई सवाल उठने लगे हैं. हाल के कुछ मामलों में, जैसे जिला पंचायत कांड और बेतालघाट गोली कांड, पुलिस की भूमिका को लेकर पहले ही सवाल खड़े हो चुके हैं. ऐसे में 31 दिसंबर की रात की सुरक्षा को लेकर होटल मालिकों पर जिम्मेदारी डालना क्या पुलिस की असफलता का संकेत है? क्या नैनीताल पुलिस भीड़ संभालने में खुद को असमर्थ मान रही है? इन सवालों पर अब शहर में खुली चर्चा हो रही है.