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महादेव के जयकारों से गूंजा केदारनाथ, कपाट खुलने पर भक्तों में उत्साह; जानें नियम समेत रास्तों की डिटेल्स

चार धाम यात्रा शुरू हो चुकी है और आज केदारनाथ के कपाट खुल गए हैं. केदारनाथ के कपाट खुलने पर भक्तों ने जयकारे लगाए. यहां जानें सभी सवालों के जवाब.

Shilpa Shrivastava
महादेव के जयकारों से गूंजा केदारनाथ, कपाट खुलने पर भक्तों में उत्साह; जानें नियम समेत रास्तों की डिटेल्स
Courtesy: X (@uttarakhandcops)

उत्तराखंड: चार धाम यात्रा की शुरुआत हो चुकी है. उत्तराखंड में पवित्र चार धाम यात्रा में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ शामिल है. वैसे तो यात्रा 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलने के साथ शुरू हुई थी. वहीं, आज केदारनाथ के कपाट खुल गए हैं और बद्रीनाथ के कपाट 23 अप्रैल से खुलेंगे. केदारनाथ मंदिर के कपाट आज बुधवार को विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. 

कपाट खुलते ही पूरा धाम हर-हर महादेव और जय बाबा केदार के जयकारे से गूंज उठा. देश-विदेश से आए हजारों भक्त सुबह से लंबी कतारों में खड़े थे. ठंड और मुश्किल रास्तों के बावजूद भक्तों में जबरदस्त उत्साह दिख रहा है. मंदिर में बाबा केदार की पूजा-अर्चना और आरती हुई.

भक्तों की सुरक्षा की गई सुनिश्चित:

इस यात्रा पर को लेकर अगर आपके मन में कोई सवाल है, तो उसका जवाब हम आपको यहां दे रहे हैं. इस साल यात्रा के लिए कई नियम बनाए गए हैं, जिससे भक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और बेहतर व्यवस्थाएं भी लागू की जा सकें. पूरी यात्रा में आमतौर पर 10 से 12 दिन लगते हैं, जिसकी शुरुआत ऋषिकेश या हरिद्वार से होती है. सबसे पहले जानते हैं चार धाम यात्रा के रास्तों के बारे में.

चार धाम यात्रा के रास्ते को लेकर यहां देखें डिटेल्स: 

  • केदारनाथ: यह सबसे कठिन तीर्थस्थल है. तीर्थयात्रियों को गौरीकुंड से 16 से 18 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है. यहां पर हेलिकॉप्टर सर्विस भी उपलब्ध है, लेकिन इसकी बुकिंग के लिए IRCTC पोर्टल पर जाना पड़ता है. यहां 177 एम्बुलेंस और एक हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस शामिल हैं.

  • बद्रीनाथ: इसका रास्ता आसान है. यह सड़क मार्ग से कनेक्टेड है. यह बुजुर्ग तीर्थयात्रियों के लिए ज्यादा उपयुक्त रहता है. 

  • यमुनोत्री: इसके लिए जानकी चट्टी से 5 से 6 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है.

  • गंगोत्री: यहां सीधे सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है.

चार धाम यात्रा के नियम: 

बता दें कि केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री के मंदिर परिसर के अंदर फोन और कैमरा ले जाना वर्जित है. इन्हें क्लॉकरूम में जमा कराना होता है. इसके साथ ही यहां मौजूद मूर्तियों, धर्मग्रंथों या घंटियों को छूना सख्त वर्जित है. तीर्थयात्रियों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा और इसके बिना एंट्री नहीं मिलेगी. रजिस्ट्रेशन कराने पर एक क्यूआर कोड या ई-पास मिलता है. इसे कई जगहों पर चेक किया जाता है. 

यहां जाने के लिए बेसिक हेल्थ चेकअप किया जाता है. बुजुर्ग तीर्थयात्रियों और हृदय, अस्थमा या डायबटीज की समस्याओं वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. इसके साथ ही पहाड़ी सड़कों पर रात 10 बजे से सुबह 4 बजे के बीच यात्रा पर रोक है. 

क्यों किए गए ये बदलाव? 

पिछले साल के एक्सपीरियंस को देखते हुए उत्तराखंड सरकार इस यात्रा को और भी सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना चाहती है. इसका उद्देश्य भीड़भाड़ को कम करना, दुर्घटनाओं को रोकना और श्रद्धालुओं को दर्शन तथा आध्यात्मिकता पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करना है.