यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई राज्यसभा की अंदरूनी जंग, कई दिग्गजों की सीट पर मंडरा रहा खतरा!

उत्तर प्रदेश में नवंबर 2026 में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होना है. भाजपा के पास वर्तमान में 8 सीटें हैं और पार्टी कई नए चेहरों को मौका देने की तैयारी कर रही है. चलिए जानते हैं अन्य पार्टियों की क्या स्थिति है.

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Km Jaya

लखनऊ: आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में नवंबर 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है. राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होना है, क्योंकि इन सीटों पर चुने गए सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है. सबसे अधिक नजर भारतीय जनता पार्टी की रणनीति पर है क्योंकि इन 10 में से 8 सीटें वर्तमान में भाजपा के पास हैं.

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा इस बार राज्यसभा चुनाव में कई नए चेहरों को मौका दे सकती है. पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश करेगी. इसी वजह से मौजूदा सांसदों में से कई के टिकट कटने की संभावना जताई जा रही है. नए चेहरों को आगे लाकर भाजपा अलग-अलग वर्गों को साधने का प्रयास कर सकती है.

राज्य में कैसा है माहौल?

राज्य में चुनावी माहौल पहले से ही गर्म है. शिक्षक और स्नातक कोटे की 11 विधान परिषद सीटों के चुनाव भी होने हैं. इसके बाद राज्यसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव होने हैं. लगातार चुनावी गतिविधियों के कारण प्रदेश की राजनीति पूरी तरह सक्रिय हो गई है. भाजपा ने विधान परिषद चुनाव के लिए अपने पांच मौजूदा उम्मीदवारों को दोबारा मौका देने का फैसला किया है, जबकि बाकी सीटों पर उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया जा रहा है.

कैसी है भाजपा की स्थिति?

राज्यसभा चुनाव के गणित पर नजर डालें तो भाजपा की स्थिति अभी भी मजबूत दिखाई देती है. पिछली बार भाजपा ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी और एक सीट बहुजन समाज पार्टी को मिली थी. वर्तमान विधानसभा संख्या बल के आधार पर भाजपा फिर से 8 सीटें जीत सकती है. दूसरी ओर समाजवादी पार्टी को इस बार एक के बजाय दो सीटें मिलने की संभावना बताई जा रही है.

बहुजन समाज पार्टी की क्या है स्थिति?

बहुजन समाज पार्टी के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है. पार्टी के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है, जिसके कारण उसका राज्यसभा प्रतिनिधित्व समाप्त हो सकता है. बसपा के एकमात्र राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल भी नवंबर में समाप्त हो रहा है.

जिन प्रमुख नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है उनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, अरुण सिंह, डॉ. दिनेश शर्मा, बृजलाल, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, नीरज शेखर, प्रो. रामगोपाल यादव और रामजी गौतम शामिल हैं.

टिकट वितरण को लेकर भाजपा में गतिविधियां बढ़ गई हैं. संभावित दावेदार लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सक्रिय हैं. पार्टी नेतृत्व और संघ से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकातों का दौर जारी है. अभिनेत्री और पूर्व सांसद जयाप्रदा सहित कई नेताओं की बढ़ी राजनीतिक सक्रियता को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है.