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AC में आराम से सोता रहा डॉक्टर, सुनील की तड़प-तड़प कर हो गई मौत, वीडियो में देखें मेरठ मेडिकल कॉलेज की लापरवाही का सबूत

लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीज सुनील की इलाज के अभाव में दर्दनाक मौत हो गई, जबकि मेडिकल स्टाफ कथित तौर पर एयर कंडीशनर के सामने सो रहा था.

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Edited By: Garima Singh
AC में आराम से सोता रहा डॉक्टर, सुनील की तड़प-तड़प कर हो गई मौत, वीडियो में देखें मेरठ मेडिकल कॉलेज की लापरवाही का सबूत
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Meerut Medical College Negligence: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज (एलएलआरएम) में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीज सुनील की इलाज के अभाव में दर्दनाक मौत हो गई, जबकि मेडिकल स्टाफ कथित तौर पर एयर कंडीशनर के सामने सो रहा था. यह घटना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल सेंटर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

सुनील को आधी रात को मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लाया गया. गंभीर हालत में स्ट्रेचर पर पड़े सुनील को तत्काल इलाज की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों की उदासीनता ने उनकी जिंदगी छीन ली. मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, मरीज तड़पता रहा, लेकिन मौके पर मौजूद मेडिकल स्टाफ एसी की ठंडी हवा में सोता रहा. इस घटना ने न केवल अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए, बल्कि मरीजों के प्रति स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही को भी कठघरे में खड़ा किया.

मेडिकल प्रशासन का रवैया

घटना के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो जूनियर डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि इस मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. हालांकि, सुनील के परिजनों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा. परिजनों का आरोप है कि अगर समय पर इलाज शुरू हो जाता, तो सुनील की जान बचाई जा सकती थी. एक परिजन ने कहा, “सोते रहे डॉक्टर, मर गया सुनील!” यह बयान अस्पताल की लापरवाही को उजागर करने के लिए काफी है.

स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल

यह घटना उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्थिति को दर्शाती है. मेरठ जैसे बड़े शहर में, जहां एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज क्षेत्र का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, वहां इस तरह की लापरवाही चिंताजनक है. मरीजों को समय पर इलाज न मिलना और स्टाफ की लापरवाही न केवल मेडिकल सिस्टम की कमियों को उजागर करती है, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी तोड़ती है.