कौन हैं नसीमुद्दीन सिद्दीकी? जो कभी मायावती के थे खास फिर थामा राहुल का 'हाथ', अब अखिलेश की 'साइकिल' पर हुए सवार
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी ने विपक्षी दलों को बड़ा झटका दिया है. बसपा, कांग्रेस और अपना दल (एस) के कई दिग्गज नेताओं ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा का दामन थाम लिया है.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी चुनावों की आहट के साथ ही सियासी उठापटक तेज हो गई है. आज का दिन समाजवादी पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि वाला रहा. जहां एक तरफ बहुजन समाज पार्टी के कई कद्दावर नेता पाला बदल रहे हैं. वहीं कांग्रेस और अपना दल (अनुप्रिया पटेल गुट) को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. दिग्गजों के इस दलबदल से चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं.
पीलीभीत के कद्दावर नेता अनीस अहमद खां उर्फ 'फूल बाबू' ने आधिकारिक तौर पर सपा का हाथ थाम लिया है. उनके साथ अपना दल (एस) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार पाल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी भी शामिल हुए हैं. सिद्दीकी के साथ उनके बेटे और पत्नी ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण की है. इसके अलावा देवरिया से पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा और कन्नौज से डॉ. दानिश खान ने भी साइकिल की सवारी शुरू कर दी है.
अनीस अहमद खां का राजनीतिक सफर
58 वर्षीय अनीस अहमद खां बीसलपुर के रहने वाले हैं. कद-काठी से मजबूत अनीस राजनीति में आने से पहले वॉलीबॉल के बेहतरीन खिलाड़ी थे. उन्हें राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता शफी अहमद खान बीसलपुर नगर पालिका के दो बार अध्यक्ष रहे थे. साल 1989 में पिता के निधन के बाद राजनीति की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी. तब से वे सक्रिय राजनीति में गरीबों की आवाज उठा रहे हैं और जमीनी पकड़ रखते हैं.
यूथ कांग्रेस से बसपा और अब सपा
अनीस ने अपने करियर की शुरुआत यूथ कांग्रेस से की थी. बाद में वे बसपा से जुड़े और बीसलपुर विधानसभा से तीन बार विधायक चुने गए. मायावती की सरकार में उन्होंने 'यूपी स्टेट एग्रो इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन' के अध्यक्ष और मंत्री के रूप में भी सेवा दी है. हालांकि. बीच में नसीमुद्दीन सिद्दीकी से विवाद के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ी थी. लेकिन फिर वापस लौट आए थे. अब वे 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सपा के साथ नई पारी शुरू कर रहे हैं.
अपना दल और कांग्रेस को बड़ा झटका
अपना दल (एस) के लिए राजकुमार पाल का जाना एक बड़ी क्षति माना जा रहा है. राजकुमार पाल अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं और पार्टी ने उन पर दांव खेलकर पिछड़ा कार्ड चला था. अब उनके सपा में जाने से अनुप्रिया पटेल के वोट बैंक में सेंध लग सकती है. वहीं. नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे अनुभवी मुस्लिम नेता का कांग्रेस छोड़कर सपा में जाना यह संकेत देता है कि अल्पसंख्यक समुदाय का झुकाव अब अखिलेश यादव की तरफ बढ़ रहा है.
सपा की बढ़ती मजबूती और भविष्य
चुनावों से ठीक पहले इतने बड़े स्तर पर नेताओं का शामिल होना सपा के बढ़ते जनाधार को दर्शाता है. अखिलेश यादव की मौजूदगी में इन नेताओं ने पार्टी की विचारधारा में विश्वास जताया है. बसपा और कांग्रेस के गढ़ में इन नेताओं की अच्छी पकड़ है. जिससे आगामी चुनावों में सपा को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी. विपक्ष के लिए इन दिग्गजों की भरपाई करना आसान नहीं होगा. क्योंकि यह केवल नेताओं का नहीं. बल्कि बड़े वोट बैंक का भी दलबदल है.
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