Maulana Tauqeer Raza: बरेली का नाम अचानक सुर्खियों में तब आ गया जब 'आई लव मोहम्मद' विवाद पर विरोध प्रदर्शन बिगड़कर हिंसा में बदल गया. स्थानीय नेताओं के आह्वान और सोशल मीडिया पर फैलती सूचनाओं ने माहौल गरम कर दिया, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान मौलाना तौकीर रजा खान की ओर गया. उनके एक ऐलान ने शहर की शांति व्यवस्था को हिलाकर रख दिया.
यह पहली बार नहीं कि तौकीर रजा विवादों में रहे हैं, उनका पुराना कद और जुड़ाव इस इलाके की राजनीतिक और धार्मिक गतिशीलता को भुनाने के लिए पर्याप्त रहा है.
मौलाना तौकीर रजा खान बरेली के एक प्रभावशाली मुस्लिम नेता और इत्तेहाद ए मिल्लत काउंसिल (IMC) के अध्यक्ष हैं. वे अहमद रजा खान के परपोते बताये जाते हैं, जिनका नाम बरेलवी आंदोलन से जुड़ा है. रजा खुद को समुदाय का पैरोकार बताते हैं और सामाजिक-धार्मिक मसलों में उनकी आवाज व्यापक है. 2010 में उनके खिलाफ दंगों से जुड़ा एक मामला दर्ज हुआ था जो अब भी कोर्ट में लंबित है. यह लंबा विवादित रिकॉर्ड बताता है कि उनकी मौजूदगी किसी भी स्थानीय घटना को किस हद तक बढ़ा सकती है.
तौकीर रजा का विवादों से पुराना नाता रहा है. ज्ञानवापी से जुड़े घटनाक्रम के समय उन्होंने 'जेल भरो' जैसे आंदोलनों की घोषणा की थी. हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने के बाद हुई हिंसा के दौरान भी उनके भड़काऊ बयानों की रिपोर्टस आई थीं. कई बार उन्होंने ऐसी बातें कही कि वे कानून और व्यवस्था के दायरे से बाहर लगती हैं, जैसे 'अगर हमला होगा तो हम अपनी हिफाजत खुद करेंगे' जैसी टिप्पणी. ऐसे बयानों ने उनके समर्थकों में जुझारूपन बढ़ाया और विरोधियों में चिंताएं पैदा कीं.
'आई लव मोहम्मद' पोस्टर के मद्देनजर तौकीर रजा ने विरोध का आह्वान किया और कहा कि सरकार के पास एक हफ्ते का समय है, नहीं तो सड़कों पर आकर आवाज उठाई जाएगी. पुलिस ने पहले ही हाई अलर्ट जारी कर जुमे की नमाज शांतिपूर्ण कराने की तैयारी कर ली थी, लेकिन नमाज के बाद कितने लोगों ने उनके आह्वान को गंभीरता से लिया, यह साफ दिखा. प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ने और पुलिस पर पथराव करने लगे, जिस पर पुलिस को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी.
इस घटना ने दिखाया कि स्थानीय भारत की संवेदनशील साम्प्रदायिक पृष्ठभूमि में एक नेता के आह्वान से किस तरह व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. प्रशासन के लिए अब चुनौती है कि वह शांतिपूर्ण संवाद और कड़ाई के बीच संतुलन रखकर माहौल को ठंडा करे. साथ ही सामाजिक मंचों पर फैलती अफवाहों को नियंत्रित करना और कानूनी कार्रवाई द्वारा असामाजिक तत्वों की पहचान कर शांति बहाल करना जरूरी होगा.