लखनऊ को जाम से मिलेगी राहत! शहीद पथ पर 23 किमी एलिवेटेड रोड की तैयारी

लखनऊ में बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ रहे वाहनों के दबाव ने शहर की यातायात व्यवस्था को नई चुनौती दे दी है. खासकर शहीद पथ पर रोजाना लगने वाले लंबे जाम ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है.

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Meenu Singh

लखनऊ में बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ रहे वाहनों के दबाव ने शहर की यातायात व्यवस्था को नई चुनौती दे दी है. खासकर शहीद पथ पर रोजाना लगने वाले लंबे जाम ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. अब इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशने के लिए शहीद पथ पर एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की तैयारी शुरू हो गई है. प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के निर्माण से न केवल ट्रैफिक दबाव कम होगा, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच सफर भी तेज और सुगम हो सकेगा.

इस दिशा में रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर शहीद पथ पर एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण का प्रस्ताव दिया है. बताया जा रहा है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस परियोजना को लेकर शुरुआती अध्ययन और योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. प्रस्तावित एलिवेटेड रोड की लंबाई लगभग 23 किलोमीटर हो सकती है.

बढ़ते ट्रैफिक ने बढ़ाई चिंता

शहीद पथ वर्तमान समय में लखनऊ के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है. कामता, चिनहट और अन्य प्रमुख चौराहों पर रोजाना वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं. सुबह और शाम के व्यस्त समय में लोगों को घंटों जाम का सामना करना पड़ता है. इसी कारण एलिवेटेड रोड को सबसे व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है.

क्यों जरूरी है एलिवेटेड कॉरिडोर?

राजनाथ सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 2001 की तुलना में लखनऊ की आबादी और वाहनों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है. जहां उस समय शहर की आबादी करीब 22 लाख थी, वहीं अब यह आंकड़ा 45 लाख के आसपास पहुंच चुका है. इसी तरह पंजीकृत वाहनों की संख्या भी लगभग 29 लाख हो गई है. सड़क के दोनों ओर सीमित जगह होने के कारण चौड़ीकरण संभव नहीं है, इसलिए एलिवेटेड रोड बेहतर समाधान माना जा रहा है.

कमता चौराहे के लिए भी विशेष योजना

प्रस्ताव में हाईकोर्ट के निकट स्थित कमता चौराहे पर क्लोवर लीफ इंटरचेंज विकसित करने का सुझाव भी दिया गया है. यह क्षेत्र ट्रैफिक जाम के लिए जाना जाता है और यहां बेहतर यातायात प्रबंधन की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है.

एलडीए को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

सूत्रों के अनुसार, परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का दायित्व लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को सौंपा जा सकता है. डीपीआर तैयार होने के बाद लागत, डिजाइन और निर्माण की समयसीमा तय की जाएगी. परियोजना पूरी होने पर शहीद पथ पर यातायात का दबाव कम होगा और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बेहतर सड़क नेटवर्क विकसित हो सकेगा.