गूगल मैप पर अत्यधिक निर्भरता एक बार फिर यात्रियों के लिए मुसीबत बन गई. इस बार, दिल्ली से साइकिल पर नेपाल जा रहे दो फ्रांसीसी नागरिक गूगल मैप द्वारा दिखाए गए गलत रास्ते के कारण बरेली के चुरैली डैम पहुंच गए, जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने उनकी मदद की.
जा रहे थे नेपाल पहुंच गए चुरैली डैम
फ्रांस के ब्रायन जैक्स गिलबर्ट और सेबेस्टीयन फ्रैंकॉइस ग्रेबियल 7 जनवरी को हवाई मार्ग से दिल्ली पहुंचे थे. उनका लक्ष्य साइकिल से नेपाल के काठमांडू तक यात्रा करना था. 8 जनवरी को वे दिल्ली से अपनी यात्रा पर निकल पड़े, पूरी तरह से गूगल मैप पर भरोसा करते हुए. उन्हें पीलीभीत होते हुए उत्तराखंड के टनकपुर के रास्ते काठमांडू जाना था, लेकिन गूगल मैप उन्हें गलत दिशा में ले गया और वे बहेड़ी के पास चुरैली डैम पहुंच गए.
विदेशी नागरिकों ने पुलिस का जताया आभार
अंधेरा होने के कारण दोनों साइकिल सवार भ्रमित हो गए और उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था. अपनी साइकिलें एक जगह खड़ी करके वे मदद की तलाश में भटकने लगे. अंततः वे बहेड़ी पुलिस चौकी पहुँचे और पुलिसकर्मियों से सहायता मांगी. भाषा की समस्या के कारण शुरू में पुलिसकर्मी उनकी बात नहीं समझ पाए. इसके बाद, बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य से फोन पर उनकी बात कराई गई. एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद, पुलिस ने उन्हें सुरक्षित रूप से सही रास्ते पर पहुँचाया. सहायता मिलने पर फ्रांसीसी नागरिकों ने भारतीय पुलिस का आभार व्यक्त किया.
लगातार भटका रहा गूगल मैप
यह पहली बार नहीं है जब गूगल मैप के कारण लोग रास्ता भटके हैं या दुर्घटना का शिकार हुए हैं. बरेली में ही ऐसी एक और दुखद घटना हुई थी: नवंबर 2024 की घटना: 25 नवंबर 2024 को, गूगल मैप के सहारे फर्रुखाबाद जा रहे तीन युवक एक अधूरे पुल से नीचे गिर गए थे, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी. कोहरे के कारण उन्हें पुल दिखाई नहीं दिया और उनकी कार रामगंगा नदी में जा गिरी थी.
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि यात्रा के दौरान केवल गूगल मैप पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है. यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय लोगों से जानकारी लें और अन्य पारंपरिक तरीकों का भी उपयोग करें ताकि वे सुरक्षित रूप से अपनी मंजिल तक पहुँच सकें.