T20 World Cup 2026

'जब तक गरीबों को लाभ नहीं, तब तक वेतन नहीं लूंगा', इस जिले के कलेक्टर ने पेश की अनूठी मिसाल

राजसमंद के जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने अनूठी पहल करते हुए ऐलान किया है कि जिले के सभी गरीब लाभार्थियों का सत्यापन पूरा होने तक वे जनवरी माह का वेतन नहीं लेंगे.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

जयपुर: राजस्थान की नौकरशाही में राजसमंद जिले के कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. कारण है उनका एक साहसिक और संवेदनशील निर्णय. उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक जिले के सभी पात्र गरीब परिवारों का सत्यापन कर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक वे जनवरी महीने का अपना वेतन स्वीकार नहीं करेंगे. उनका यह कदम प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ मानवीय संवेदना का उदाहरण बन गया है.

जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने कहा कि अगर किसी अधिकारी का वेतन दस दिन भी देर से आता है तो पूरे घर की व्यवस्था प्रभावित हो जाती है. बच्चों की फीस, ईएमआई और जरूरी खर्च बिगड़ जाते हैं. ऐसे में उन्होंने सोचा कि जिन गरीब परिवारों को सरकार से मात्र 1500 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, अगर उनका भुगतान तीन महीने रुक जाए तो यह अन्याय से कम नहीं. यही सोच उनके फैसले की वजह बनी.

व्यक्तिगत अनुभव से जुड़ा फैसला

कलेक्टर हसीजा ने अपने जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके माता-पिता 1947 के विभाजन के समय सब कुछ छोड़कर भारत आए थे. वे अभाव का दर्द भली-भांति समझते हैं. उन्होंने कहा कि गरीबी केवल आंकड़ा नहीं होती, यह रोजमर्रा की जद्दोजहद है. यही कारण है कि वे चाहते हैं कि प्रशासन की वजह से किसी भी जरूरतमंद का हक न रुके.

कितने लोग और कौन सी योजनाएं?

राजसमंद जिले में करीब 30 हजार लोग ऐसे हैं जो गरीब श्रेणी में आते हैं. इनमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थी, पालनहार योजना से जुड़े अनाथ बच्चे और सामाजिक न्याय विभाग की पेंशन योजनाओं के पात्र लोग शामिल हैं. इनमें विधवा, एकल महिला और वृद्धजन प्रमुख हैं. इन सभी का जीवन सरकारी सहायता पर काफी हद तक निर्भर है.

जनवरी में सत्यापन पूरा करने का संकल्प

कलेक्टर के अनुसार जिले में अभी भी 30 से 40 हजार लोगों का सत्यापन शेष है. उन्होंने साफ कहा कि जब तक आखिरी व्यक्ति का सत्यापन नहीं होगा, वे संतुष्ट नहीं होंगे. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दिन-रात मेहनत कर जनवरी माह में ही यह काम पूरा किया जाए, ताकि किसी भी गरीब को लाभ से वंचित न रहना पड़े.

कर्मचारियों पर भरोसा और प्रशासनिक अनुभव

अरुण कुमार हसीजा ने कहा कि उन्हें अपने कर्मचारियों की क्षमता पर पूरा भरोसा है. पहले भी कृषक अधिकार पंजीयन पखवाड़े में सीमित समय में बड़ा काम पूरा किया गया था. उन्होंने बताया कि शाम के समय गांवों में जाकर सरल तरीके से पंजीयन कराया गया. उसी अनुभव के आधार पर उन्हें विश्वास है कि यह लक्ष्य भी अगले 15 दिनों में हासिल कर लिया जाएगा.

राज्य स्तर पर बड़ी चुनौती

राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का बड़ा बैकलॉग चल रहा है. राज्य में 20 लाख से अधिक लोग वार्षिक सत्यापन न होने के कारण पेंशन, पालनहार और खाद्य सुरक्षा योजनाओं से वंचित हैं. प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 71 लाख से ज्यादा और एनएफएसए के 4 करोड़ से अधिक लाभार्थी हैं. ऐसे में राजसमंद कलेक्टर की पहल एक मिसाल बनकर उभरी है.