अक्षय तृतीया पर मुस्लिम शिक्षकों ने कराई शादी, कई दूल्हा-दुल्हन ने गुस्से में छोड़ा विवाह सम्मेलन

श्योपुर जनपद पंचायत सीईओ श्याम सुंदर भटनागर ने बताया कि मुस्लिम शिक्षकों ने सिर्फ व्यवस्था संभाली, गायत्री परिवार ने कराई शादी, फेरे लिए गए या नहीं इसकी जानकारी नहीं है, अधिकांश जोड़ों की शादी हुई.

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Anvi Shukla

Muslim Teachers Duty In Mass Marriage: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में आज अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर आयोजित मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत विवाह सम्मेलन में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. जिला मुख्यालय के हैवी मशीनरी टीनशेड परिसर में आयोजित इस विवाह समारोह में कुल 231 जोड़ो की शादी कराई गई, लेकिन समारोह के दौरान कुछ ऐसी घटनाएं हुईं जिन्होंने आयोजन की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए.

सम्मेलन में मौजूद कुछ जोड़ों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि विवाह की वैदिक विधि गायत्री परिवार द्वारा कराई जानी थी, लेकिन विवाह वेदी पर 10 मुस्लिम शिक्षकों ने कथित रूप से पुरोहित की भूमिका निभाई. इससे कुछ जोड़े बिना फेरे लिए ही समारोह से लौट गए. कुछ जोड़ों ने बाद में अन्य स्थानों पर जाकर सनातन रीति से विवाह संस्कार पूर्ण किए.

प्रशासन ने आरोपों को किया खारिज

जनपद पंचायत श्योपुर के CEO श्याम सुंदर भटनागर ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा, 'मुस्लिम शिक्षकों ने विवाह मंत्र नहीं पढ़े, वे केवल व्यवस्था संभालने के लिए वेदी के पास बैठे थे. विवाह संस्कार गायत्री परिवार के सदस्यों द्वारा कराए गए हैं. मुझे जानकारी है कि लगभग सभी जोड़ों की शादी संपन्न हुई.'

कई शिक्षकों की पहचान सामने आई

सूत्रों के अनुसार, जिन शिक्षकों पर आरोप लगे हैं, उनमें इस्माइल खान, बुंदू खान, शमशाद खान, मुमताज अली, सफदर हुसैन नकवी, गजला नोमानी, इमाम अली, मुनव्वर जहां और नुजहत परवीन के नाम शामिल हैं. सभी को गायत्री परिवार के मार्गदर्शन में जोड़ों को विधि समझाने की जिम्मेदारी दी गई थी.

दूसरे सम्मेलन में फिर से कर रहे शादी

ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें जोड़े अब अन्य सम्मेलन में जाकर वैदिक रीति से दोबारा विवाह कर रहे हैं. खिरनी निवासी लोकेश ने बताया कि वे अब अपने गांव में आयोजित सम्मेलन में विवाह करेंगे, क्योंकि उन्हें इस आयोजन की प्रक्रिया पर संदेह है.