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पत्नी की हत्या के झूठे आरोप में पति लगाता रहा कोर्ट के चक्कर, अचानक लवर के साथ पकड़ी गई महिला; फिर करोड़ों में मांगा मुआवजा

कर्नाटक हाईकोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस जांच और न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बेकसूर साबित हो चुके सुरेश उर्फ कुरुबारा सुरेश ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 1 लाख रुपये की जगह 5 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है.

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Princy Sharma

Karnataka News: कर्नाटक हाईकोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस जांच और न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बेकसूर साबित हो चुके सुरेश उर्फ कुरुबारा सुरेश ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 1 लाख रुपये की जगह 5 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है. वजह उसे अपनी जिंदा पत्नी की हत्या के झूठे आरोप में कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़े.

अप्रैल 2025 में सेशन कोर्ट ने सुरेश को पत्नी की हत्या के मामले से बरी कर दिया था. कोर्ट ने पाया कि पूरी जांच फर्जी दस्तावेजों और झूठे सबूतों पर आधारित थी. यहां तक कि कोर्ट ने इसे जानबूझकर गढ़ा गया केस बताया, न कि सिर्फ एक लापरवाही. इतना ही नहीं, अदालत ने पुलिस इंस्पेक्टर प्रकाश बीजी के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया, जिन पर झूठी चार्जशीट दाखिल करने का आरोप है.

जिंदा निकली पत्नी

पुलिस ने दावा किया था कि सुरेश ने पत्नी की हत्या कर उसके शव और हथियार को झाड़ियों में छिपा दिया था. लेकिन सुरेश ने खुद पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई थी, जिसके बाद ही एक अज्ञात महिला का शव मिलने पर उस पर आरोप लगाया गया. मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब ट्रायल के दौरान सुरेश की पत्नी कोर्ट में पेश हो गई. उसे परिवार वालों ने पहचान लिया. इसके बाद कोर्ट ने पाया कि सुरेश के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और पूरी जांच संदिग्ध थी.

अब सुरेश की मांग

सुरेश ने हाईकोर्ट में अर्जी देकर 5 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है और यह भी कहा है कि उसे आरोपी नहीं, पीड़ित माना जाए. साथ ही, उसने BNS 2023 की धारा 229 और 231 के तहत दोषी पुलिस अफसरों पर आपराधिक कार्रवाई की मांग की है.

पुलिस पर सख्त कार्रवाई के आदेश

सेशन कोर्ट ने मैसूरु एसपी को निर्देश दिया है कि वह अज्ञात शव के मामले की दोबारा जांच करें, साथ ही IGP (मैसूरु डिवीजन) को आदेश दिया गया है कि इंस्पेक्टर प्रकाश और उनके तीन सहयोगियों जितेंद्र कुमार, प्रकाश एम यत्तिनमणि और महेश बीके के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए.