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4 साल से इस्तेमाल नहीं हुआ था विमान, ब्लैक बॉक्स के बगैर खराब मौसम में भरी उड़ान; झारखंड एयर एंबुलेंस क्रैश मामले में नया खुलासा

झारखंड के चतरा जिले में सोमवार रात रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें सातों लोग मारे गए. विमान में ब्लैक बॉक्स नहीं था. प्लेन चार साल तक इस्तेमाल ही नहीं हुआ था और खराब मौसम को कारण माना जा रहा है. जांच जारी है.

@eshankhan78616
Kuldeep Sharma

झारखंड के चतरा जिले में सोमवार रात एक दिल दहला देने वाली घटना हुई, जब रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एम्बुलेंस क्रैश हो गई. इस हादसे में मरीज समेत सात लोगों की मौत हो गई. परिवार वाले अब मुआवजे और न्याय की मांग कर रहे हैं. जांच में सामने आया है कि विमान में ब्लैक बॉक्स नहीं था. साथ ही यह भी पता चला है कि इस विमान ने चार साल तक उड़ान नहीं भरी थी और उसी रास्ते पर पहले भी खराब मौसम की वजह से अन्य विमानों को रास्ता बदलना पड़ा था.

ब्लैक बॉक्स की अनुपस्थिति

अधिकारियों ने बताया कि इस बीचक्राफ्ट सी-90 किंग एयर विमान में कोई ब्लैक बॉक्स नहीं मिला. सिविल एविएशन नियमों के अनुसार 5700 किलोग्राम से कम वजन वाले विमानों में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर या फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर लगाना जरूरी नहीं है. अब जांचकर्ता एयर ट्रैफिक कंट्रोल के रिकॉर्ड, मलबे की जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों पर निर्भर रहेंगे. इससे हादसे का सटीक कारण जानना मुश्किल हो सकता है.

खराब मौसम का संकट

मौसम को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है. विमान ने खराब मौसम की वजह से दाहिनी ओर डायवर्जन मांगा था. उसी रूट पर एयर इंडिया और इंडिगो के विमानों ने भी पहले खराब मौसम से बचने के लिए रास्ता बदला था. एक इंडिगो फ्लाइट ने बाईं ओर डायवर्जन लिया था. डीजीसीए और एएआईबी की जांच पूरी होने के बाद ही असली वजह सामने आएगी.

चार साल तक खड़ा रहा विमान

जानकारी के मुताबिक यह विमान 2018 से 2022 तक चार साल तक उड़ान नहीं भरी थी. दिल्ली की कंपनी रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड इसे संचालित कर रही थी. इतने लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से विमान की तकनीकी स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं. जांच में इस पहलू की भी गहराई से पड़ताल की जा रही है.

परिवार की मांग और दर्द

मृतक मरीज संजय कुमार के परिजनों ने मुआवजा और न्याय की मांग की है. उन्होंने बताया कि संजय की हालत बिगड़ने पर डॉक्टर ने एयर एम्बुलेंस से ले जाने की सलाह दी थी. इसकी लागत करीब 8 लाख रुपये आई. परिजन सुझित कुमार और विजय कुमार ने कहा कि कंपनी को सिर्फ पैसे की चिंता थी. वे बच्चों और परिवार के लिए इंसाफ चाहते हैं.