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डायबिटीज के नकली इंजेक्शन जब्त, गुरुग्राम पुलिस ने किया गिरोह का भंडाफोड़; मास्टरमाइंड गिरफ्तार

गुरुग्राम में नकली डायबिटीज इंजेक्शन बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है. पुलिस ने 70 लाख रुपये के नकली इंजेक्शन बरामद कर मास्टरमाइंड समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
डायबिटीज के नकली इंजेक्शन जब्त, गुरुग्राम पुलिस ने किया गिरोह का भंडाफोड़; मास्टरमाइंड गिरफ्तार
Courtesy: @Chhotukingoffi1 x account

गुरुग्राम: एक संयुक्त अभियान में गुरुग्राम पुलिस और औषधि नियंत्रण विभाग की टीमों ने नकली मुंजेरो इंजेक्शन बनाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया. पुलिस टीम ने गिरोह के सरगना और अन्य आरोपियों को सफलतापूर्वक धर दबोचा. पुलिस ने बताया कि यह गिरोह गुरुग्राम के सेक्टर 69 स्थित एक फ्लैट में ये नकली इंजेक्शन बना रहा था और इन्हें शहर के पॉश इलाकों में सप्लाई करने की योजना बना रहा था. 

इन नकली दवाओं के वितरण पर रोक लगाने के लिए पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क और सप्लाई चेन की जांच कर रही है. पुलिस ने बताया कि उन्हें हाल ही में एक ऐसे गिरोह के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी जो नकली मुंजेरो इंजेक्शन की सप्लाई में शामिल था. 

क्या लिया गया है एक्शन?

इस जानकारी पर कार्रवाई करते हुए, गिरोह के सरगना और सदस्यों को पकड़ने के लिए पुलिस और औषधि नियंत्रण विभाग के कर्मियों की एक संयुक्त टीम गठित की गई. शनिवार को इस टीम ने नकली इंजेक्शन बनाने के पीछे के सरगना जिसकी पहचान अमिश शर्मा के रूप में हुई है और उसके एक साथी को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने क्या बताया?

पुलिस ने पुष्टि की कि आरोपियों के पास से लगभग ₹70 लाख के नकली इंजेक्शन बरामद किए गए हैं. पुलिस के अनुसार सप्लायर इन इंजेक्शनों की खेप को दिल्ली के भागीरथ पैलेस से गुरुग्राम के एक पॉश इलाके में स्थित एक हाई-एंड कमर्शियल हब गैलेरिया मार्केट तक पहुंचाने की योजना बना रहा था.

कहां से मंगवाया जाता है इंजेक्शन?

मिली जानकारी के अनुसार मुंजेरो इंजेक्शन मूल रूप से इटली से भारत में आयात किया जाता है. जहां एक ओर इसका उपयोग मुख्य रूप से डायबिटीज के मरीज अपने ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए करते हैं, वहीं हाल के दिनों में वजन घटाने के उद्देश्य से संपन्न लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता में भारी उछाल आया है. 

इसी मांग का फायदा उठाते हुए, आरोपियों ने नकली इंजेक्शन बनाने और बेचने का एक रैकेट खड़ा कर लिया था, जिससे जन स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो गया था. पुलिस अब इस खतरनाक सांठगांठ की पूरी गहराई तक पहुँचने और उन सभी जगहों की पहचान करने के लिए जांच कर रही है जहाँ इन नकली सामानों की सप्लाई की जा रही थी.

औषधि नियंत्रण विभाग ने क्या बताया?

औषधि नियंत्रण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि असली उत्पाद और नकली संस्करण की ब्रांडिंग और पैकेजिंग में काफी अंतर होता है. असली इंजेक्शन 2 से 8 डिग्री तापमान पर सप्लाई किए जाते हैं, जबकि बरामद किए गए इंजेक्शन बिना किसी मानक का पालन किए सप्लाई किए जा रहे थे. मानकों की यही कमी उनके नकली होने का सबसे पुख्ता सबूत साबित हुई.