'हम डूब रहे हैं, बचा लो', मौत से पहले की वो आखिरी कॉल; जबलपुर क्रूज हादसे में खत्म हो गया हंसता-खेलता परिवार
जबलपुर के बरगी डैम में एक दर्दनाक क्रूज हादसे ने दिल्ली के एक परिवार की खुशियां उजाड़ दीं. मां, बेटी और मासूम सहित कुल 9 लोगों की मौत हो गई. लापरवाही इस त्रासदी की मुख्य वजह रही.
नई दिल्ली: खुशियों की तलाश में जबलपुर गया दिल्ली के मायापुरी का एक परिवार मातम में डूब गया. 29 अप्रैल को एक पारिवारिक समारोह के लिए निकला यह परिवार जब बरगी डैम में क्रूज की सवारी का आनंद ले रहा था, तभी कुदरत का कहर टूटा. अचानक आए तूफान और तेज आंधी ने क्रूज को बीच पानी में पलट दिया. इस हादसे में दिल्ली की त्रीजा ने अपनी आंखों के सामने नहीं, बल्कि फोन कॉल पर अपने प्रियजनों को मौत की आगोश में जाते सुना.
त्रीजा ने बताया कि उनकी बड़ी बहन मरीना ने हादसे से ठीक पहले वीडियो कॉल कर सब दिखाया था. तब सब खुश थे, लेकिन 30 मिनट बाद दोबारा कॉल आया और मरीना ने रोते हुए कहा कि वे डूब रहे हैं. मरीना ने त्रीजा से प्रार्थना करने को कहा. कुछ सेकेंड की दुआओं के बाद फोन कट गया और सिर्फ डरावनी चीखें सुनाई दीं. त्रीजा ने इस हादसे में मां, बहन और भांजे को हमेशा के लिए खो दिया.
सुरक्षा में बड़ी चूक और प्रबंधन पर आरोप
हादसे के बाद क्रूज प्रबंधन पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं. त्रीजा के अनुसार, जब क्रूज पानी में उतरा तो किसी को भी लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी. जब मौसम बिगड़ा और क्रूज डूबने लगा, तब आनन-फानन में जैकेट बांटी गईं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. सुरक्षा उपकरणों का समय पर न मिलना एक गंभीर अपराध है, जिसने कई मासूम जिंदगियों को मौत के मुहाने पर धकेल दिया.
मां-बेटे की वो मार्मिक तस्वीर
रेस्क्यू टीम को मरीना और उनके 4 साल के बेटे त्रिशान का शव जिस हाल में मिला, उसे देखकर हर किसी का कलेजा कांप गया. मरीना ने मौत के आखिरी पलों में भी अपने कलेजे के टुकड़े को अपने सीने से मजबूती से चिपका रखा था. गोताखोरों ने बताया कि मां ने बेटे को इस कदर आगोश में लिया था कि वे पानी में भी अलग नहीं हुए.
परिवार के सदस्यों की स्थिति और दर्द
क्रूज पर त्रीजा के परिवार के कुल छह सदस्य सवार थे. इनमें से प्रदीप वर्मा, सिया और जूलियस मेसी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. लेकिन मां मधुर (62), बहन मरीना (39) और मासूम त्रिशान (4) इस हादसे का शिकार बन गए. दिल्ली की खजान बस्ती में रहने वाले इस परिवार के लिए यह यात्रा कभी न भूलने वाला जख्म बन गई है. बचे हुए सदस्य अब भी उस खौफनाक मंजर से उबर नहीं पाए हैं.