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जेल से चलती थी 'क्राइम कंपनी', लॉरेंस बिश्नोई सहित 19 गुर्गों पर दिल्ली कोर्ट ने कसा शिकंजा; मकोका के तहत आरोप तय

दिल्ली की एक अदालत ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगियों पर संगठित अपराध सिंडिकेट चलाने के आरोप तय किए हैं. पटियाला हाउस कोर्ट का यह फैसला 2021 के एक पुराने मामले में आया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. एडिशनल सेशंस जज प्रशांत शर्मा ने बिश्नोई और उसके 19 साथियों के खिलाफ मकोका (MCOCA) जैसी सख्त धाराओं के तहत आरोप तय करने का औपचारिक आदेश दिया है. पुलिस का दावा है कि बिश्नोई जेल की सलाखों के पीछे से अपना खौफनाक नेटवर्क चला रहा था. यह गिरोह हत्या, फिरौती और अपहरण जैसे संगीन अपराधों के जरिए कई राज्यों में दहशत फैला रहा था.

अदालत ने बिश्नोई पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की धारा 3 और 4 के तहत आरोप लगाए हैं. इसके अलावा, उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट और विस्फोटक अधिनियम की विभिन्न धाराओं में भी मामला दर्ज किया गया है. पुलिस के अनुसार, यह गिरोह एक संगठित अपराधी समूह के रूप में सक्रिय था. कोर्ट के इस आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सिंडिकेट द्वारा किए गए अपराधों की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और इसमें कड़ा कानूनी कदम जरूरी है.

जेल से चल रहा था सिंडिकेट

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि बिश्नोई और उसके साथी जेल के भीतर से ही आपराधिक गतिविधियों का संचालन कर रहे थे. वहां से वे दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अपना उगाही का नेटवर्क चला रहे थे. जांचकर्ताओं ने जेल के भीतर से गिरोह के सदस्यों के पास से कई मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं. इन फोनों का इस्तेमाल सहयोगियों के साथ संपर्क साधने और खौफनाक वारदातों को अंजाम देने के लिए किया जाता था.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला जाल

पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस सिंडिकेट का प्रभाव केवल भारत तक ही सीमित नहीं है. गिरोह के कुछ सदस्य थाईलैंड, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका से अपनी गतिविधियां निर्देशित कर रहे थे. इस तरह बिश्नोई ने जेल में रहकर भी अपने नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया. यह अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन दिखाता है कि यह अपराधी सेटअप कितना आधुनिक और संगठित है. विदेशी धरती से संचालित यह नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.

गंभीर अपराधों का लंबा काला चिट्ठा

अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि यह गिरोह समन्वित रूप से हत्या, हत्या के प्रयास, लूटपाट और अपहरण जैसी वारदातों में शामिल रहा है. इनका मुख्य उद्देश्य डरा-धमकाकर वित्तीय लाभ हासिल करना था. पुलिस ने कोर्ट को सबूत पेश किए कि कैसे यह सिंडिकेट सुनियोजित तरीके से हमलों को अंजाम देता था. बिश्नोई का नेटवर्क इतना खतरनाक है कि जेल की सुरक्षा भी इसे रोकने में नाकाम दिख रही थी. अब आरोप तय होने के बाद इस पर कानूनी शिकंजा और अधिक कसेगा.