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सफेद स्मॉग की चादर में लिपटी राजधानी, AQI 375 पार, सांस लेना हुआ मुश्किल

दिल्ली में लगातार तीसरे दिन वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है. औसत AQI 375 तक पहुंच गया है, जबकि कई इलाकों में स्थिति गंभीर है. स्मॉग और धीमी हवा से स्वास्थ्य संकट गहराया है.

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Kuldeep Sharma

देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा की चपेट में है. रविवार की सुबह घने सफेद स्मॉग के साथ शुरू हुई, जिसने लोगों की सांसें थाम दीं. लगातार तीसरे दिन वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई है और औसत AQI 375 तक पहुंच चुका है. मौसम में गिरावट और सुस्त हवाओं ने प्रदूषण को जमीन के पास रोक दिया है, जिससे पूरे एनसीआर में हालात बिगड़ते जा रहे हैं.

दिल्ली पर छाई स्मॉग की घनी चादर

रविवार सुबह दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में धुंध और स्मॉग की मोटी परत नजर आई. इंडिया गेट, कनॉट प्लेस और प्रमुख सड़कों पर दृश्यता काफी कम रही. वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर धीमी गति से चलना पड़ा. विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड बढ़ने और हवा की गति कम होने से प्रदूषक तत्व ऊपर नहीं उठ पा रहे, जिससे सांस लेने वाली हवा और जहरीली हो गई है.

गंभीर श्रेणी में पहुंचे कई इलाके

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ‘समीर’ ऐप के अनुसार दिल्ली के कई इलाके गंभीर स्थिति में पहुंच चुके हैं. अलीपुर में AQI 421 दर्ज किया गया, जबकि जहांगीरपुरी और वजीरपुर में यह 404 तक पहुंच गया. कुल 39 निगरानी केंद्रों में से अधिकतर स्थानों पर हवा ‘बहुत खराब’ स्तर पर बनी हुई है, जो यह साफ दर्शाता है कि प्रदूषण पूरे शहर में फैल चुका है.

मौसम की मार और सुस्त हवाएं

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तर-पश्चिम दिशा से चलने वाली हवाओं की रफ्तार 8 किलोमीटर प्रति घंटे से भी कम है. कम हवा और गिरते तापमान के कारण प्रदूषण के कण वातावरण में फंस गए हैं. यही वजह है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में धुंध लंबे समय तक बनी हुई है और फिलहाल राहत की कोई ठोस उम्मीद नजर नहीं आ रही.

GRAP के तहत बढ़ाई गई पाबंदियां

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत सख्त कदम लागू किए हैं. निर्माण कार्य, धूल फैलाने वाली गतिविधियों और कुछ औद्योगिक कार्यों पर नियंत्रण बढ़ाया गया है. इसके बावजूद मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और मानवीय गतिविधियों के चलते हालात संभलते नहीं दिख रहे हैं.

स्वास्थ्य के लिए बढ़ा खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणी की हवा सीधे फेफड़ों और हृदय पर असर डालती है. बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है. विशेषज्ञों ने सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने, N95 मास्क पहनने और घरों में खिड़कियां बंद रखने की सलाह दी है.