रांची: जगन्नाथ मंदिर में दानपेटी लूटने आए दरिंदों ने की गार्ड की हत्या, भड़के लोगों ने किया सड़क जाम; 3 आरोपी गिरफ्तार
रांची के धुर्वा स्थित जगन्नाथ मंदिर में गार्ड बिरसा मुंडा की हत्या कर अपराधियों ने दानपेटी से नकदी चोरी कर ली. घटना के विरोध में परिजनों और स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया.
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में एक मंदिर के गार्ड की हत्या कर दी गई. गुरुवार रात धुर्वा स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में अपराधियों ने गार्ड की हत्या कर दी. जिसकी पहचान बिरसा मुंडा के रूप में हुई है. दान पेटी से पैसे चुराए और मौके से फरार हो गए. इस घटना के बाद शुक्रवार को घंटों तक हंगामा मचा रहा क्योंकि लोगों ने इस अपराध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.
पुलिस और पीड़ित परिवार के सदस्यों के बीच झड़पें भी हुईं. गुस्साए स्थानीय लोगों ने सड़कें जाम कर दीं. मंदिर ट्रस्ट समिति और प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप से हुई बातचीत के बाद आखिरकार भीड़ शांत हुई. इस बीच पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. सभी आरोपी मंदिर के आसपास के इलाके के ही रहने वाले हैं. दान पेटी से चुराए गए पैसे बरामद कर लिए गए हैं.
क्या है पूरा मामला?
जगन्नाथ मंदिर के पुजारी श्रीराम मोहंती और मंदिर के सेवक दिलीप के अनुसार वे शुक्रवार सुबह 5:00 बजे दैनिक पूजा के लिए मंदिर पहुंचे और मुख्य द्वार खोलने के लिए गार्ड को कई बार आवाज दी. कोई जवाब न मिलने पर दोनों मंदिर के पिछले दरवाजे से अंदर दाखिल हुए, जहां उन्होंने गर्भ गृह के सामने मंडप में गार्ड का शव पड़ा हुआ पाया.
खबर मिलते ही मृतक के परिवार वाले मौके पर पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया. उन्होंने हत्यारों की गिरफ्तारी के साथ-साथ पीड़ित के आश्रितों के लिए मुआवजे और नौकरी की मांग करते हुए सड़कें जाम कर दीं.
कैसी थी वहां की स्थिति?
धुर्वा में हंगामे के दौरान परिवार के सदस्यों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं. मंदिर ट्रस्ट समिति के साथ बातचीत के बाद पुलिस परिवार के सदस्यों को शांत कराने और उन्हें वहां से हटाने में सफल रही. इसके अलावा अपराधियों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई.
FSL यानी फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की एक टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और कई नमूने इकट्ठा किए. इसके बाद तीन लोगों को हिरासत में लिया गया. ये तीनों पहले भी चोरी के आरोप में जेल जा चुके हैं. इस बीच मंदिर में शुद्धिकरण की रस्में, प्रार्थनाएं और हवन किए जाने के बाद दोपहर में भोग और आरती हुई. शादी से जुड़ी रस्मों के लिए अनुमति न मिल पाने के कारण, कई बारातें और दुल्हन पक्ष के लोग खाली हाथ लौट गए.