मुंबई: टी20 विश्व कप के फाइनल की अब उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है. आज भारत बनाम इंग्लैंड मुकाबले के बाद टूर्नामेंट को अपना दोनों फाइनलिस्ट मिल जाएगा. टूर्नामेंट का खिताबी मुकाबला 8 मार्च को खेला जाएगा. लेकिन उससे पहले मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड के बीच टूर्नामेंट का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला खेला जाएगा. ऐसे में मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम गुरुवार शाम एक बड़े क्रिकेट युद्ध का गवाह बनने वाला है. यहां कि पिच कापी अहम रोल अदा करने वाली है.
जैसे ही सूरज ढलेगा और फ्लडलाइट्स चमकेंगी, मैदान पर सिर्फ भारत और इंग्लैंड के खिलाड़ियों की टक्कर ही नहीं होगी, बल्कि ओस की नमी भी खेल की दिशा बदल सकती है. अक्सर यहां रात के समय घास पर जमी हल्की नमी गेंदबाजों के लिए मुश्किल और बल्लेबाजों के लिए राहत बन जाती है, जिससे मैच का समीकरण पलट सकता है. इस कारण यहां पर टॉस की रणनीति आपको मैच जीता सकती है.
वानखेड़े स्टेडियम समुद्र के बेहद करीब स्थित है. शाम ढलने के साथ ही यहां तापमान में भी गिरावट होती है और अरब सागर से आने वाली नमी मैदान की सतह पर जमने लगती है. इसके कारण मैदान पर गेंद फिसलने लगती है और गेंदबाजों के लिए उसे पकड़ना मुश्किल हो जाता है.
स्पिनरों के लिए गेंद पर पकड़ बनाना कठिन होता है, जबकि तेज गेंदबाज भी लाइन-लेंथ नियंत्रित करने में जूझते हैं. इसके साथ ही बल्लेबाजों को गेंद तेजी से बल्ले पर आती महसूस होती है, जिससे रन बनाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है.
वानखेड़े के टी20 इतिहास पर नजर डालें तो पहले गेंदबाजी करने वाली टीमों ने ज्यादा सफलता पाई है. यहां 123 मैचों में लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम जीती है, जबकि पहले बल्लेबाजी करने वाली टीमों को 92 जीत मिली हैं. हालांकि इस विश्व कप में तस्वीर थोड़ी अलग रही है. अब तक खेले गए सात मैचों में तीन बार पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने स्कोर बचाने में सफलता हासिल की है.
हाल में मुंबई के मौसम का मिजाज थोड़ा गर्म रहा है. जिस कारण पिच को तेज गर्मी से सूखने से बचाने के लिए उस पर हल्की घास छोड़ी गई है और नियमित पानी दिया गया है. अंतिम समय में घास काटी जाएगी ताकि पिच पारंपरिक तेज और उछाल वाली तैयार हो सके. बता दें यहां पर दिन में तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है, जिससे पहली पारी में पिच सख्त रहेगी लेकिन रात में ओस बढ़ सकती है.
इतिहास में वानखेड़े पर तेज गेंदबाजों का दबदबा रहा है. यहां पेसर्स ने स्पिनरों की तुलना में लगभग दोगुने विकेट लिए हैं. लेकिन इस विश्व कप में स्पिन और पेस के आंकड़े लगभग बराबरी पर हैं. स्पिनरों ने 24.65 के औसत से 40 विकेट लिए हैं, जबकि तेज गेंदबाजों को 27 के औसत से 43 विकेट मिले हैं.
दोनों कप्तानों के सामने सबसे बड़ी दुविधा टॉस के बाद फैसला लेने की होगी. पहले बल्लेबाजी करने से बोर्ड पर बड़ा स्कोर बनाकर दबाव डाला जा सकता है. लेकिन अगर दूसरी पारी में ओस ज्यादा पड़ती है, तो लक्ष्य का पीछा करना काफी आसान हो सकता है. ऐसे में गुरुवार का सेमीफाइनल सिर्फ खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि परिस्थितियों की भी परीक्षा लेने वाला है. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि टॉस जीतने वाले कप्तान टॉस जीतकर संभवतः पहले बल्लेबाजी का फैसला ले सकते हैं.