menu-icon
India Daily

नाक के बजाय मुंह से सांस लेना बन सकता है सेहत के लिए खतरा, जानें इसके साइड इफेक्ट्स

नाक के बजाय मुंह से सांस लेना देखने में सामान्य लग सकता है, लेकिन यह शरीर के लिए हानिकारक होता है. यह दांत, मसूड़े, नींद और दिमाग की कार्यक्षमता पर असर डालता है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
नाक के बजाय मुंह से सांस लेना बन सकता है सेहत के लिए खतरा, जानें इसके साइड इफेक्ट्स
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: कई बार सुबह उठते ही लोगों को मुंह सूखा हुआ महसूस होता है या तकिए पर लार के निशान दिखाई देते हैं. ये संकेत हो सकते हैं कि व्यक्ति रात में नाक के बजाय मुंह से सांस ले रहा था. देखने में यह सामान्य लग सकता है, लेकिन लंबे समय तक मुंह से सांस लेना शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकता है. सामान्य रूप से हमारा शरीर नाक से सांस लेने के लिए बना है.

नाक हवा को फिल्टर, गर्म और नम बनाती है ताकि फेफड़ों में साफ और सुरक्षित हवा पहुंचे. नाक के अंदर मौजूद छोटे-छोटे सिलिया और म्यूकस धूल, प्रदूषण और बैक्टीरिया को रोकते हैं. जब नाक बंद हो जाती है या सांस लेने में दिक्कत होती है, तो शरीर अपने आप मुंह से सांस लेना शुरू कर देता है. कुछ लोगों में यह आदत स्थायी हो जाती है, जिसे 'माउथ ब्रीदिंग' कहा जाता है.

क्या है इसका कारण?

नाक के बजाय मुंह से सांस लेने के कई कारण हो सकते हैं. पहला, नाक बंद होना, जो सर्दी, एलर्जी या साइनस की समस्या के कारण होता है. दूसरा, बच्चों में बढ़े हुए एडेनोइड्स या टॉन्सिल्स, जो नाक का रास्ता बंद कर देते हैं. तीसरा, नाक की संरचना में गड़बड़ी जैसे टेढ़ा सेप्टम या पॉलीप्स. इसके अलावा कुछ लोगों के चेहरे या जबड़े की बनावट ऐसी होती है कि मुंह स्वाभाविक रूप से थोड़ा खुला रहता है. स्लीप एपनिया नामक नींद की समस्या में भी व्यक्ति रात में मुंह खोलकर सांस लेने लगता है.

स्वास्थ्य पर कैसे पड़ता है इसका असर?

लंबे समय तक मुंह से सांस लेने का स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. सबसे पहले, मुंह का सूखापन और बदबूदार सांस की समस्या होती है क्योंकि लार सूखने पर बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं जिसकी वजह से दांतों और मसूड़ों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. लार में मौजूद खनिज दांतों को मजबूत रखते हैं, लेकिन मुंह से सांस लेने से कैविटी और मसूड़ों की सूजन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

क्या-क्या होता है इसका नुकसान?

नींद की गुणवत्ता भी घट जाती है, जिससे स्लीप एपनिया, थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान में कमी जैसी समस्याएं होती हैं. बच्चों में यह आदत चेहरे की बनावट पर असर डाल सकती है, जिससे चेहरा लंबा और जबड़ा पतला हो सकता है. लगातार मुंह से सांस लेने से ऑक्सीजन की कमी होती है, जिससे ब्रेन फॉग और थकान महसूस होती है.

क्या है डॉक्टर्स की सलाह?

डॉक्टरों के अनुसार, अगर किसी को लगातार नाक से सांस लेने में परेशानी हो रही है तो उसे ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए. समय रहते इलाज न करने पर यह आदत शरीर के लिए गंभीर परिणाम दे सकती है.