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200 साल जी सकते हैं इंसान! इस चीज ने खोला अमरत्व का राज; DNA में छिपा है सीक्रेट

एंटी एजिंग का राज अब साइंस ने खोज निकाला है. 200 साल की उम्र तक जीने की यह खोज इंसानों के लिए अमृत बन सकती है...

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Ashutosh Rai

इंसानों के मने में हमेशा जिंदगी को लेकर इच्छाएं बढ़ती जाती है. कभी-कभी एक मनुष्य के जीवन में ऐसा समय आता है, जब उसको अपनी उम्र से ज्यादा जीने का दिल करता है. इसी इच्छा को पूरा करने के लिए सदियों से साइंस से लेकर जादू सब कुछ आजमाया जा चुका है. सांइस की मानें तो अब यह इच्छा पूरी होने वाली है. इसका रहस्य समुद्र की गहराइयों में छिपा हुआ है. वैज्ञानिकों ने एक ऐसे प्रोटीन की खोज की है, जो आपको 200 साल की उम्र तक जीने दे सकता है.

साइंस कहती है- शायद हां, और इसका जवाब समंदर की गहराइयों में छिपा है। वैज्ञानिकों ने बोहेड व्हेल (Bowhead Whale) में एक ऐसा प्रोटीन खोजा है जो DNA की मरम्मत कर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर के शोधकर्ताओं का दावा है कि यह खोज इंसानों की उम्र 200 साल तक पहुंचाने की कुंजी बन सकती है।

क्या है पूरा मामला?

नेचर जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक, बोहेड व्हेल करीब 200 साल तक जिंदा रहती है और कैंसर जैसी बीमारियों से भी दूर रहती है. वैज्ञानिक वेरा गोरबुनोवा और आंद्रेई सेलुआनोव ने पाया कि इस व्हेल में CIRBP नाम का एक DNA-रिपेयर प्रोटीन दूसरे स्तनधारियों के मुकाबले करीब 100 गुना ज्यादा पाया जाता है. यह प्रोटीन DNA में होने वाले डबल-स्ट्रैंड ब्रेक यानी गंभीर आनुवंशिक क्षति को ठीक करता है, जो इंसानों में बुढ़ापे और कैंसर की वजह बनता है.

कैंसर से लड़ने की क्षमता

बोहेड व्हेल के शरीर की खासियत यह है कि इतनी लंबी उम्र और अरबों कोशिकाओं के बावजूद उसे कैंसर नहीं होता। इसे साइंस में पेटो का विरोधाभास कहा जाता है. सिद्धांत कहता है कि जितनी ज्यादा कोशिकाएं, उतना ज्यादा कैंसर का खतरा, लेकिन व्हेल इस नियम को तोड़ती है. शोधकर्ताओं ने पाया कि व्हेल की कोशिकाओं में कैंसर पैदा करने वाले म्यूटेशन जमा ही नहीं होते.

इंसानों पर क्या असर?

वैज्ञानिकों ने व्हेल के CIRBP प्रोटीन को इंसानी कोशिकाओं और फल-मक्खियों में ट्रांसप्लांट किया. नतीजा हैरान करने वाला रहा- DNA की मरम्मत बेहतर हुई और फल-मक्खियां ज्यादा दिनों तक जिंदा रहीं. शोध में यह भी पता चला कि ठंडा तापमान इस प्रोटीन के उत्पादन को बढ़ा सकता है. यानी ठंडे इलाकों में रहने वालों की उम्र लंबी हो सकती है.

क्या इंसान बन पाएगा 200 साल का?

हालांकि, वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह रिसर्च अभी शुरुआती दौर में है। इंसानों पर इसके असर को लेकर अभी और गहन अध्ययन की जरूरत है, लेकिन एक बात तय है कि अगर यह प्रोटीन इंसानों में भी काम कर गया, तो बुढ़ापा धीमा करने, कैंसर का खतरा कम करने और उम्र को 200 साल तक बढ़ाने का सपना सच हो सकता है.