menu-icon
India Daily

सरकारी नौकरी ही चाहिए! 32,438 पदों पर भर्ती के लिए रेलवे को 1.08 करोड़ लोगों ने भेजा आवेदन

 32,438 आरआरबी ग्रुप डी पदों के लिए 1.08 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया. जिससे भारी प्रतिस्पर्धा सामने आई. मुंबई में सबसे अधिक आवेदन दर्ज किए गए. यह रोजगार चुनौतियों के बीच सरकारी नौकरियों की मांग को दर्शाता है. 

reepu
Edited By: Reepu Kumari
सरकारी नौकरी ही चाहिए! 32,438 पदों पर भर्ती के लिए रेलवे को 1.08 करोड़ लोगों ने भेजा आवेदन
Courtesy: Pinterest

RRB Group D recruitment 2025: सरकारी नौकरी की चाहत देश में बहुत है. आपने सुना होगा कि यूपी और बिहार के लोग सरकारी नौकरी में ज्यादा होते हैं. लेकिन रेलवे की इस भर्ती नोटिफिकेश के बाद जो आवेदन आए हैं उससे तो कुछ और ही लग रहा है. रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) ने कई पदों पर भर्ती निकाली है. इसकी चर्चा बहुत हो रही. अधिसूचना के अनुसार ग्रुप डी भर्ती में भर्ती निकली है. आपको यकीन नहीं होगा इसके लिए 1.08 करोड़ से अधिक लोगों ने अप्लाई किया है. सबसे ज्यादा  मुंबई से आवेदन आए हैं. कुल 15,59,100 (या 15.59 लाख) उम्मीदवारों ने अप्लाई किया है.

भारतीय रेलवे ग्रुप डी भर्ती अभियान में रेलवे में विभिन्न लेवल 1 पद शामिल हैं, जैसे ट्रैक मेंटेनर ग्रेड- IV, सहायक पॉइंट्समैन और इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिग्नल और दूरसंचार जैसे विभागों में तकनीकी सहायक. 

कुल 32,438 खाली पदों की घोषणा 

आरआरबी ने पहले ग्रुप डी पदों के लिए कुल 32,438 खाली पदों पर भर्ती निकाली थी. लेकिन अब जारी आवेदनों की संख्या लगता है कुछ और ही कह रही है. आवदनों की संख्या देख कर लग रहा है कि इस बार तगड़ा कॉम्पटीशन होने वाला है. 

ऑनलाइन आवेदन प्रोसेस रोक दिया गया है. आरआरबी द्वारा जल्द ही ग्रुप डी भर्ती के लिए परीक्षा के तारीखों का ऐलान करेगा. यहां जान लेते हैं किस राज्य से कितने आवेदन आए हैं इसके बारे में हम आपको डिटेल बता रहे हैं. 

आरआरबी प्राप्त आवेदन
अहमदाबाद 6,39,269
अजमेर 3,59,409
बेंगलुरु 2,75,307
भोपाल 4,51,096
भुवनेश्वर 2,65,840
बिलासपुर 4,32,897
चंडीगढ़ 11,60,404
चेन्नई 11,12,922
गोरखपुर 3,62,092
गुवाहाटी 10,72,841
कोलकाता 7,93,572
मुंबई 15,59,100
पटना 3,33,972
प्रयागराज 8,61,666
रांची 1,81,339
सिकंदराबाद 9,60,697
कुल 1,08,22,423

भारत रोजगार रिपोर्ट 2024 में कहा गया है कि श्रम बाजार संकेतकों में सुधार हुआ है, लेकिन ये लाभ आर्थिक संकट के दौर के साथ मेल खाते हैं, जिससे पता चलता है कि नौकरियों की गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है.