यूरोप में नया हाई-वोल्टेज ड्रामा, दोस्ती से दुश्मनी तक... यूक्रेन और पोलैंड आए आमने-सामने; जानें वजह

यूक्रेन की एक सैन्य यूनिट का नाम UPA के नाम पर रखने के फैसले के बाद पोलैंड और यूक्रेन के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है. चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

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Km Jaya

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और पड़ोसी देश पोलैंड के रिश्तों में तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब जेलेंस्की ने यूक्रेन की एक विशेष सैन्य यूनिट का नाम ऐतिहासिक संगठन यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) के नाम पर रखने का फैसला किया. इस कदम ने पोलैंड में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी क्योंकि पोलैंड लंबे समय से इस संगठन पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हजारों पोलिश नागरिकों के नरसंहार का आरोप लगाता रहा है.

विवाद इतना बढ़ गया कि पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नवरोकी ने जेलेंस्की को दिया गया देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान वापस लेने की मांग कर दी. इसके जवाब में जेलेंस्की ने सार्वजनिक रूप से वह सम्मान वापस भेज दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्हें लगा था यह सम्मान यूक्रेन की जनता और सेना के साहस के लिए दिया गया था.

कब दिया गया था ये सम्मान?

यह सम्मान वर्ष 2023 में पोलैंड के पूर्व राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा द्वारा जेलेंस्की को दिया गया था. उस समय पोलैंड यूक्रेन के सबसे मजबूत समर्थकों में शामिल था और रूस के खिलाफ संघर्ष में लगातार मदद कर रहा था.

विवाद के केंद्र में मौजूद UPA एक ऐसा संगठन था जिसने 1940 और 1950 के दशक में यूक्रेन की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया था. हालांकि पोलैंड का आरोप है कि इसी संगठन ने वोलहिनिया और पूर्वी गैलिसिया क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पोलिश नागरिकों की हत्या की थी. वर्ष 2016 में पोलैंड की संसद ने इन घटनाओं को आधिकारिक तौर पर नरसंहार घोषित किया था. इसी कारण यूक्रेन द्वारा UPA को सम्मानित किए जाने को पोलैंड ने अपमानजनक माना.

यूक्रेन के अधिकारियों ने क्या कहा?

यूक्रेन के अधिकारियों ने पोलैंड के फैसले की आलोचना की है. यूक्रेनी पक्ष का कहना है कि यह कदम दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता है और इससे रूस को राजनीतिक फायदा मिल सकता है. वहीं पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है. उन्होंने कहा कि असली चुनौती रूस के खिलाफ संघर्ष है और सहयोगी देशों के बीच ऐसे विवाद केवल विरोधियों को मजबूत करते हैं.

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय चर्चाएं होने वाली हैं. ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव यूरोप की राजनीति और क्षेत्रीय सहयोग पर असर डाल सकता है.