यूक्रेन से लड़ाकी की भारी कीमत चुका रहा रूस, हर दिन हो रहा इतने करोड़ डॉलर का नुकसान
यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस को रोजाना करीब 10 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है. तेल रिफाइनरियों और बंदरगाहों पर लगातार हो रहे हमलों से रूस का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. जबकि रूस की अर्थव्यवस्था की कमर तेल से ही बंधी है.
यूक्रेन की ड्रोन सेना ने रूस की तेल व्यवस्था को ऐसा घेरा है कि अब मॉस्को को रोजाना करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है. यूक्रेन के अनुसार, रूस के प्रमुख बंदरगाहों से तेल की रोजाना 8,80,000 बैरल की खेप घट गई है. ड्रोन हमले सिर्फ रिफाइनरियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तेल परिवहन के रास्तों और बंदरगाहों को भी निशाना बनाया जा रहा है. इससे रूस को अपनी सेना के लिए धन जुटाने में भारी दिक्कतें आ रही हैं. यूक्रेन का कहना है कि इसका असर युद्ध के मैदान पर भी दिखने लगा है.
बंदरगाहों पर ड्रोन हमले, तेल निर्यात ठप
यूक्रेन ने रूस के प्रमुख तेल बंदरगाहों प्रिमोर्स्क, उस्त-लूगा, शेषखारिस और तुआप्से को अपना निशाना बनाया है. जब शेषखारिस टर्मिनल क्षतिग्रस्त हो गया, तो रूस ने तुआप्से के रास्ते तेल भेजने की कोशिश की. लेकिन यूक्रेनी सेना को यह पता चल गया और उन्होंने तुआप्से पर भी हमला कर दिया. तुआप्से में रोसनेफ्ट की तेल रिफाइनरी में आग लगी हुई है, जिसे बुझाने की कोशिशें जारी हैं. यह रिफाइनरी रूस की दस सबसे बड़ी रिफाइनरियों में शामिल है. यूक्रेनी OSINT प्रोजेक्ट साइबरबोरोशनो के अनुसार, आग और भी भयानक हो गई है और पड़ोसी टैंकों में फैल गई है.
बच्चों की मौत, रिहायशी इमारतें भी चपेट में
तुआप्से में हुए इस हमले में दो मासूम बच्चों की जान चली गई. एक की उम्र सिर्फ पांच साल थी, तो दूसरा 14 साल का. साथ ही दो अन्य वयस्क भी घायल हो गए. यह हमला रिहायशी इलाके में हुआ, जिसने इस युद्ध की भयावहता को एक बार फिर दिखा दिया. यूक्रेन का कहना है कि वह सिर्फ सैन्य ठिकानों को ही नहीं, बल्कि उन संसाधनों को निशाना बना रहा है, जिनसे रूस को युद्ध लड़ने की ताकत मिलती है. लेकिन जब ऐसे हमलों में आम नागरिक मारे जाते हैं, तो यह चिंता का विषय बन जाता है.
रूस के सामने विकल्पों का संकट
रूस अब तेल भेजने के लिए वैकल्पिक रास्तों पर निर्भर है, लेकिन ये रास्ते भी अब भीड़भाड़ वाले और अक्षम होते जा रहे हैं. यूक्रेनी कमांडर रॉबर्ट ब्रोवदी ने टेलीग्राम पर बताया कि उनकी सेना रूस की तेल परिवहन व्यवस्था के साथ-साथ तेल भेजने के रास्तों और बंदरगाहों पर लगातार हमले कर रही है. यूक्रेन की अनमैन्ड सिस्टम्स फोर्सेज का दावा है कि वे रूस के तेल बुनियादी ढांचे को लगातार निशाना बना रहे हैं, जिससे तेल शोधन, निर्यात और रसद में भारी नुकसान हो रहा है.
युद्ध के मैदान पर दिखने लगा असर
यूक्रेन का कहना है कि इस रणनीति का असर अब सीधे युद्ध के मैदान पर दिखने लगा है. उनके अनुसार, दुश्मन के पास जितने कम संसाधन होंगे, उतने ही ज्यादा मौके हमारी इकाइयों के लिए बनेंगे. यूक्रेनी सेना ने बयान में कहा कि कदम दर कदम, दुश्मन की तेल रसद व्यवस्था अपनी क्षमता खोती जा रही है. इसके नतीजे युद्ध के मैदान पर पहले से ही महसूस किए जा रहे हैं. दुश्मन के लिए कम संसाधनों का मतलब हमारी इकाइयों के लिए ज्यादा अवसर हैं.