Russia Japan Earthquake: हाल ही में रूस के कामचटका प्रायद्वीप में आए भूकंप ने पूरी दुनिया को हिला दिया है. यह भूकंप इतना शक्तिशाली था कि इसकी ऊर्जा हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से करीब 14,300 गुना ज्यादा थी. वैज्ञानिकों के अनुसार, इसमें लगभग 9 x 10^17 जूल्स यानी 6.27 मिलियन टन TNT की ऊर्जा निकली, जो किसी भी बड़े शहर को पूरी तरह से तबाह करने में सक्षम है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भूकंप पैसिफिक रिंग ऑफ फायर पर आया. वह इलाका जो दुनिया में सबसे अधिक भूकंपीय और ज्वालामुखीय गतिविधियों के लिए जाना जाता है. यही कारण है कि रूस, जापान और अमेरिका जैसे देश भयभीत हैं, क्योंकि समुद्र के नीचे इतनी तीव्रता का भूकंप सुनामी का कारण बन सकता है.
भूकंप की तीव्रता को मॉमेंट मैग्नीट्यूड स्केल पर मापा जाता है, जो लॉगरिदमिक होती है यानी एक अंक बढ़ने पर ऊर्जा 31.6 गुना बढ़ती है. इसे "ग्रेट अर्थक्वेक" की श्रेणी में रखा जाता है.
जापान में 2011 में आए 9.0 तीव्रता के तोहोकु भूकंप ने न केवल सुनामी लाई थी, बल्कि फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट में विकिरण रिसाव भी हुआ था. उस घटना में लगभग 28,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 360 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था. रूस में कामचटका इलाका पहले से ही भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियों के लिए संवेदनशील है. भले ही यहां की आबादी कम है, लेकिन इसका असर जापान और अमेरिका तक पहुंच सकता है.
अगर इस स्तर का भूकंप समुद्र के नीचे आता है, तो यह विशाल सुनामी को जन्म दे सकता है, जैसे कि 2004 में हिंद महासागर में आए भूकंप ने किया था. उस समय लगभग ढ़ाई लाख लोग मारे गए थे, जिनमें भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया शामिल थे. वैज्ञानिक लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इस तरह के भूकंप सिर्फ कंपन नहीं, बल्कि इतिहास बदलने वाली आपदाएं ला सकते हैं.