उत्तर कोरिया में हाई वोल्टेज ड्रामा, सत्ता को लेकर किम जोंग उन की बहन और बेटी में तेज हुई जंग

उत्तर कोरिया में किम जोंग उन के बाद सत्ता की चाबी किसके पास होगी, इसे लेकर हलचल तेज है. 13 वर्षीय बेटी किम जू ए और उनकी बहन किम यो-जोंग के बीच उत्तराधिकार की जंग अब तेज होती दिख रही है.

@piebyfour
Sagar Bhardwaj

प्योंगयांग की रहस्यमयी और बंद दीवारों के पीछे एक ऐसा सत्ता संघर्ष शुरू हो चुका है, जो आने वाले समय में पूरी दुनिया की राजनीति को प्रभावित करेगा. उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन अपनी विरासत को सुरक्षित करने के लिए नई बिसात बिछा रहे हैं. दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसी के ताजा दावे बताते हैं कि अब उत्तराधिकार की लड़ाई उनकी छोटी बेटी और उनकी अनुभवी बहन के बीच केंद्रित है. यह कहानी एक परमाणु शक्ति संपन्न देश के भविष्य की दिशा तय करेगी.

किम राजवंश का लंबा पुरुष प्रधान इतिहास 

साल 1948 में देश की स्थापना के बाद से उत्तर कोरिया में हमेशा किम परिवार के पुरुषों का ही एकाधिकार रहा है. संस्थापक किम इल सुंग के बाद उनके बेटे किम जोंग इल ने कमान संभाली. किम जोंग उन को भी साल 2011 में पिता की मृत्यु के बाद बेहद कम उम्र और सीमित तैयारी के साथ सत्ता सौंपी गई थी. विश्लेषकों का मानना है कि शायद इसी अनुभव के कारण वह अब अपनी बेटी को सार्वजनिक मंचों पर पहले से तैयार कर रहे हैं.

किम जू ए की उत्तराधिकारी के रूप में ताजपोशी 

दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी एनआईएस ने सांसदों को जानकारी दी है कि 13 साल की किम जू ए को भविष्य की नेता नामित करने की तैयारी लगभग अंतिम चरण में है. उत्तर कोरिया जल्द ही अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक कांफ्रेंस आयोजित करने वाला है, जहां किम जोंग उन अपने आगामी पांच वर्षों के लक्ष्यों की घोषणा करेंगे. इस महत्वपूर्ण बैठक में जू ए की उपस्थिति यह स्पष्ट कर सकती है कि क्या वह किम राजवंश की चौथी पीढ़ी की अगली आधिकारिक उत्तराधिकारी बनने वाली हैं.

रूढ़िवादी मान्यताओं और परंपराओं में बदलाव 

शुरुआत में वैश्विक जानकारों को संदेह था कि उत्तर कोरिया का पुरुष प्रधान समाज किसी महिला को अपने सर्वोच्च नेता के रूप में स्वीकार करेगा. वहां की संस्कृति हमेशा से बेहद रूढ़िवादी रही है जहां नेतृत्व का अधिकार केवल पुरुषों के पास था. हालांकि, सरकारी मीडिया में जू ए की लगातार बढ़ती सक्रियता ने इन पुरानी धारणाओं को बदलना शुरू कर दिया है. किम जोंग उन उसे हर महत्वपूर्ण सैन्य परेड और रणनीतिक कार्यक्रमों में साथ रखकर देश को एक नया स्पष्ट संदेश दे रहे हैं.

किम यो-जोंग का प्रभाव और अनुभव

इस सत्ता संघर्ष में किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग एक बेहद शक्तिशाली किरदार के रूप में खड़ी हैं. वह लंबे समय से शासन के प्रमुख नीतिगत फैसलों में अपने भाई की विश्वसनीय सलाहकार रही हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि एक सख्त और प्रभावी नेता की है. उत्तराधिकार की इस दौड़ में जू ए के पास जहां पिता का संरक्षण है, वहीं यो-जोंग के पास शासन चलाने का वर्षों का ठोस अनुभव है. यह आंतरिक प्रतिस्पर्धा प्योंगयांग के भीतर नए समीकरण पैदा करेगी.

भविष्य की दिशा और वैश्विक सुरक्षा चिंताएं 

आने वाले समय में किम जोंग उन का हर कदम यह तय करेगा कि इस तानाशाही का भविष्य किस ओर मुड़ेगा. क्या 13 साल की जू ए को पूर्ण नेतृत्व के लिए आवश्यक सैन्य समर्थन मिल पाएगा या सत्ता का असली केंद्र यो-जोंग की ओर झुक जाएगा? दुनिया भर के विश्लेषक प्योंगयांग की इस उथल-पुथल को बहुत गहराई से देख रहे हैं. सत्ता के इस हस्तांतरण का प्रभाव न केवल कोरियाई प्रायद्वीप की शांति पर पड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा पर भी इसके गहरे परिणाम होंगे.