नासा ने एलियंस को पानी में डूबा कर मार डाला, एक गलती से जीवन किया समाप्त, वैज्ञानिक का सनसनीखेज दावा
जर्मनी के बर्लिन स्थित टेक्निकल यूनिवर्सिटी के डॉ. शुल्ज़े-मकुच ने एक चौंकाने वाला दावा किया है कि नासा ने लगभग 50 साल पहले मंगल ग्रह पर एलियंस को मार दिया था. उनका कहना है कि नासा ने मंगल पर किसी तरह के एलियंस को खत्म करने का प्रयास किया था.
नासा से संबंधित एक खबर अब सोशल मीडिया पर खास कर साइंस की दुनिया में तेजी से फैल रही है. जहां जर्मनी के बर्लिन स्थित टेक्निकल यूनिवर्सिटी के डॉ. शुल्ज़े-मकुच ने एक चौंकाने वाला दावा किया है कि नासा ने लगभग 50 साल पहले मंगल ग्रह पर एलियंस को मार दिया था. उनका कहना है कि नासा ने मंगल पर किसी तरह के एलियंस को खत्म करने का प्रयास किया था.
यह दावा बहुत अजीब है और इस पर कई वैज्ञानिकों ने संदेह जताया है. नासा के द्वारा अब तक जो भी जानकारी दी गई है, वह मंगल पर जीवन के बारे में नहीं बल्कि वहां भेजे गए रोवर्स और मिशनों के डेटा पर आधारित है. इन मिशनों से कभी कोई ऐसा प्रमाण नहीं मिला जो यह साबित करे कि मंगल पर एलियंस हैं या नासा ने उन्हें मारने का कोई प्रयास किया. दरअसल 1976 में दो वाइकिंग लैंडर लाल ग्रह पर बाहरी ग्रहों की खोज में उतरे थे. उन्होंने पाया कि मंगल ग्रह की मिट्टी में जैव चिन्हों की जांच शुरू की. उस समय वैज्ञानिकों ने यह मान लिया था कि मंगल ग्रह पर जीवन पृथ्वी के सामान होगा तथा जल की उपस्थिति में पनपेगा.
नासा ने एलियंस को पानी से डूबा कर मार डाला
पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि मंगल ग्रह पर जीवन पृथ्वी की तरह होगा और वहां पानी की जरूरत होगी लेकिन अब वैज्ञानिकों ने यह समझा है कि जीवन बहुत शुष्क और कठिन परिस्थितियों में भी रह सकता है. जैसे पृथ्वी पर कुछ जीव सूखे और कठोर स्थानों पर भी जीवित रहते हैं, वैसे ही मंगल ग्रह पर भी जीवन हो सकता है. इस प्रकार, जीवन पानी पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि यह शुष्क वातावरण में भी खुद को अनुकूलित कर सकता है.
एक गलती से जीवन किया समाप्त
वहीं डॉ. शुल्ज़-मकुच ने बर्लिन तकनीकी विश्वविद्यालय में कहा कि नासा के लैंडर्स को मंगल ग्रह की मिट्टी से पानी और पोषक तत्व मिलाकर जीवन ढूंढने का काम दिया गया था. उनका मानना है कि यह तरीका गलत था, क्योंकि अगर बहुत ज्यादा पानी मिला दिया गया, तो वह मंगल पर रहने वाले सूक्ष्मजीवों के लिए बहुत ज्यादा हो सकता था. मंगल ग्रह की स्थितियां बहुत शुष्क हैं और वहां जीवन के लिए पानी की मात्रा बहुत कम होती है.
वैज्ञानिकों का दावा
वैज्ञानिक की मानें तो विशेष रूप से मंगल ग्रह पर सूक्ष्मजीव जो शुष्क या कठोर परिस्थितियों में जीवित रहते हैं, उन्हें अत्यधिक पानी देना उनके लिए हानिकारक हो सकता है, ठीक उसी तरह जैसे रेगिस्तान में एक मनुष्य को समुद्र में डुबोना. ऐसे में शंका है कि वो सकता है नासा ने अपनी एक गलती की वजह से एलियंस को खत्म कर दिया है. इसके बाद वाइकिंग लैंडर प्रयोग का उल्लेख है, जो मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाओं की जांच करने वाला एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परीक्षण था. हालांकि, उस समय यह पाया गया था कि लैंडर में क्लोरीनयुक्त कार्बनिक पदार्थ मौजूद थे, जिसे पहले पृथ्वी पर सफाई उत्पादों के कारण संदूषण मान लिया गया था लेकिन अब वैज्ञानिक यह मानते हैं कि ये क्लोरीनयुक्त कार्बनिक पदार्थ मंगल ग्रह के अपने मूल तत्व हो सकते हैं और जीवन द्वारा उत्पन्न किए जा सकते हैं, जो मंगल पर जीवन की संभावनाओं की ओर एक नई दिशा इशारा करता है.
वैज्ञानिकों ने वाइकिंग मिशन जैसी पिछली गलतियों से सीखा
बता दें कि मंगल ग्रह पर जीवन की खोज की दिशा में नई सोच और संभावनाओं को तलाशने की आवश्यकता है. यह उद्धरण बताता है कि वैज्ञानिकों ने वाइकिंग मिशन जैसी पिछली गलतियों से सीखा है और अब वे मंगल पर जीवन खोजने के नए तरीके पर विचार कर रहे हैं. वाइकिंग मिशन में 1970 के दशक में मंगल पर जीवन के संकेतों की तलाश की गई थी लेकिन उस समय इसके प्रयोगों से कोई महत्वपूर्ण परिणाम नहीं मिले थे. अब वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह के वातावरण और पारिस्थितिकी के बारे में बेहतर जानकारी है, और वे इसे ध्यान में रखते हुए भविष्य के जीवन खोज मिशन को बेहतर तरीके से डिजाइन करना चाहते हैं. उनका कहना है कि मंगल का वातावरण बहुत शुष्क है लेकिन जीवन वहां लवणों की मदद से पानी प्राप्त कर सकता है, जो वायुमंडल से नमी खींच सकते हैं. इस पर नए विचार से मंगल पर जीवन की खोज के लिए एक नई दिशा मिल सकती है.