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चीन ने मार्को रुबियो का नाम बदल दिया! प्रतिबंधित होने के बाद भी ऐसे मिली ट्रंप के साथ आने की इजाजत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा शुरू हो गया है. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी ट्रंप के साथ चीन पहुंच चुके हैं. हालांकि, इन चीन जाना तब संभव हो पाया, जब रूबियो के नाम में कुछ बदलाव किया गया.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी दौरे पर हैं. इस दौरान ट्रंप के साथ विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी मौजूद हैं. हालांकि, चीन ने इससे पहले जब रूबियो अमेरिकी सीनेटर थे, तो उन पर चीन आने का प्रतिबंध लगाया था. इसके बाद भी रूबियो का चीन जाना संभव हो पाया है. इसका कारण है चीन द्वारा किया गया रूबियो के नाम में बदलाव. बता दें कि प्रतिबंधों से बचने के लिए रूबियो के नाम की चीनी स्पेलिंग बदल दी गई है.

बता दें कि जब रूबियो अमेरिकी सीनेटर थे, तब उन्होंने मानवाधिकारों को लेकर चीन की आलोचना की थी. इसके जवाब में चीन ने उन पर दो बार प्रतिबंध लगाए थे, जिससे उनकी एंट्री अपने देश में बैन कर दी थी. वहीं, अब रूबियो अमेरिका के टॉप डिप्लोमैट हैं. ऐसे में इनके चीन आने के लिए चीन ने एक कूटनीतिक चाल ढूंढी है.

रूबियो के नाम का बदला चीनी अक्षर:

चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंग्यू ने कहा कि प्रतिबंध तब लगाया गया था, जब रूबियो सीनेटर थे. उन पर उनके पिछले बयानों के चलते प्रतिबंध लगाए गए थे. अब चीनी अधिकारियों और सरकारी मीडिया ने रूबियो के सरनेम को बदल दिया है. इसे लू से बदल दिया गया है. अब इनका नाम मार्को लू कर दिया गया है. बता दें कि विदेशी नामों का चीनी अनुवाद कई बार काफी मुश्किल हो जाता है. कई नेताओं के तो एक से ज्यादा चीनी नाम हो सकते हैं. अगर ट्रंप की बात करें तो चीनी सरकार इन्हें तेलांगपु कहकर पुकारती है. वहीं, कई लोग इन्हें चुआनपु भी कहते हैं.

ट्रंप और शी की होनी है अहम मीटिंग:

ट्रंप बुधवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक अहम शिखर सम्मेलन में भाग लेने बीजिंग पहुंचे. उम्मीद की जा रही है कि दोनों नेता आज ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में बातचीत करेंगे. इसके अलावा ट्रंप टेंपल ऑफ हेवन का दौरा करें. 

दोनों नेता शाम को एक भव्य रारजकीय भेज में शामिल होंगे. शुक्रवार को, ट्रंप के अमेरिका लौटने से पहले, वे चाय पिएंगे और वर्किंग लंच करेंगे. इन दोनों नेताओं की मुलाकात दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के तौर पर देखी जा रही है. जिस तरह से चीन ने रूबियो का नाम बदला है, यह दिखाता है कि चीन पुराने प्रतिबंधों और वर्तमान कूटनीतिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन बना रहा है.