क्या वेनेजुएला की तरह ही हो जाएगा ताइवान का हाल, एक हो गए ट्रंप और जिनपिंग?
अमेरिकी राष्ट्रपति के वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई के बाद दुनिया की नजर चीन और ताइवान पर है. लोगों को डर है कि ताइवान के साथ चीन भी यही ना करें. अब राष्ट्रपति ने भी यह संकेत दिया है कि ऐसा हो सकता है.
नई दिल्ली: अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून कितना मायने रखता है यह वेनेजुएला पर हुए अमेरिका सेना के एक्शन के बाद साफ हो गया है. हालांकि अब उन्होंने खुद भी न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनके लिए अनका समय और उनकी नैतिकता ज्यादा मायने रखती है.
ट्रंप के इस एक्शन के बाद सबकी नजर चीन और ताइवान पर थी. लोगों का मानना है कि जैसे अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमले कर वहां के राष्ट्रपति को हिरासत में ले लिया, वैसे ही चीन भी ताइवान के साथ पेश आ सकता है. अब इस बात पर खुद प्रेसिडेंट ट्रंप ने इशारों में बताया कि अगर चीन ऐसा करता है तो शायद अमेरिका कोई एक्शन ना ले.
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप से जब इंटरव्यू के दौरान उनकी वैश्विक शक्ति (ग्लोबल पावर) की सीमा पर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें केवल उनका दिमाग ही उन्हें रोक सकता है. उन्होंने कहा कि हां, एक चीज है. मेरी अपनी नैतिकता. मेरा अपना दिमाग ही है, जो मुझे रोक सकती है. मुझे अंतरराष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं है. हालांकि उन्होंने अपने एक्शन के पीछे तर्क देते हुए कहा कि मैं लोगों को चोट पहुंचाना नहीं चाहता. जब इस बारे में आगे पूछा गया कि क्या उनकी सरकार को अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना जरूरी नहीं समझती तो उन्होंने कहा कि मैं करता हूं. वहीं जब चीन और ताइवान में चल रहे टेंशन पर यह सवाल किया गया कि क्या अगर चीन अब ताइवान पर हमला कर दे तो आप कुछ बोल पाने की स्थिति में होंगे? तो ट्रंप ने कहा कि यह उन पर निर्भर है कि वह क्या करने जा रहे हैं.
नाटो के सवाल पर क्या बोले ट्रंप?
चीन और ताइवान के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने जवाब को थोड़ा घुमाते हुए यह भी कहा कि उन्हें पता है कि अगर वह ऐसा करेंगे तो मैं दुखी हो जाऊंगा, इसलिए वह ऐसा करेंगे ही नहीं. इसके बाद ट्रंप से यह पूछा गया कि उनके लिए ज्यादा अहम क्या है? ग्रीनलैंड को पाना या फिर यूरोपीय देशों के सैन्य संगठन, नाटो को बचाए रखना? इस सवाल पर ट्रंप ने सीधे जवाब देने से इनकार कर दिया, लेकिन स्वीकार किया कि यह एक विकल्प हो सकता है. उन्होंने कहा कि स्वामित्व बहुत महत्वपूर्ण है. वहीं ग्रीनलैंड पर कब्जा के पीछे उन्होंने तर्क दिया कि सफलता के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से इसकी आवश्यकता है.