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होर्मुज खोल देंगे लेकिन परमाणु पर बाद में होगी बात! ईरान के प्रस्ताव से ट्रंप की टेंशन बढ़ी, जानें क्यों फंसा है पेंच

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने का नया प्रस्ताव अमेरिका को भेजा है, लेकिन परमाणु मुद्दे पर बाद में बात करने की शर्त रखी है. पाकिस्तान के माध्यम से दिया गया यह प्रस्ताव वॉशिंगटन में टेंशन बढ़ा रहा है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
होर्मुज खोल देंगे लेकिन परमाणु पर बाद में होगी बात! ईरान के प्रस्ताव से ट्रंप की टेंशन बढ़ी, जानें क्यों फंसा है पेंच
Courtesy: @Madhurendra13

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच दो महीने से जारी तनावपूर्ण जंग अब एक नया मोड़ लेती दिख रही है. ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने का प्रस्ताव दिया है. ईरान भी इसके लिए तैयार है कि पहले जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल दिया जाए और अमेरिकी नाकाबंदी हटा ली जाए. बदले में वह परमाणु हथियार और यूरेनियम संवर्धन पर चर्चा बाद में करने की बात कह रहा है. इस प्रस्ताव ने वॉशिंगटन में चिंता पैदा कर दी है क्योंकि अमेरिका डर रहा है कि नाकाबंदी हटने के बाद ईरान परमाणु मुद्दे पर दबाव में नहीं आएगा. मध्यस्थ देशों की भूमिका भी इस डील को जटिल बना रही है.

ईरान का नया प्रस्ताव और शर्तें

ईरान ने अमेरिका को साफ संदेश दिया है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और नाकाबंदी हटाने के लिए तैयार है. लेकिन परमाणु बातचीत तभी शुरू होगी जब समुद्री संकट पूरी तरह सुलझ जाएगा. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने संकेत दिया कि फिलहाल आर्थिक राहत प्राथमिकता है. ईरान लंबे समय तक सीजफायर बढ़ाने या इसे स्थायी बनाने की भी बात कर रहा है. यह प्रस्ताव ईरानी नेतृत्व के अंदर चल रहे मतभेदों को दरकिनार करके लाया गया है.

परमाणु मुद्दे पर 'वेट एंड वॉच' मोड

ईरान परमाणु रियायतों पर अभी फैसला टालना चाहता है. विदेश मंत्री अरागची के अनुसार, यूरेनियम संवर्धन की सीमा और संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करने पर ईरानी लीडरशिप में पूरी सहमति नहीं है. इसलिए ईरान पहले आर्थिक दबाव कम करना चाहता है. अमेरिका इस रणनीति से चिंतित है क्योंकि अगर नाकाबंदी पहले हट गई तो ईरान को परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए मजबूर करना मुश्किल हो जाएगा.

अमेरिका में बढ़ी टेंशन

ईरान के इस प्रस्ताव ने वॉशिंगटन में टेंशन बढ़ा दी है. अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि नाकाबंदी हटने से परमाणु मांगों पर दबाव कम हो जाएगा. अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन को लंबे समय के लिए निलंबित करे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही अपनी सुरक्षा टीम के साथ हाई-लेवल मीटिंग कर सकते हैं, जिसमें इस प्रस्ताव और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी. ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि बिना ठोस समझौते के नाकाबंदी जारी रह सकती है.

मध्यस्थ देशों की सक्रिय भूमिका

इस डील में पाकिस्तान के अलावा मिस्र, तुर्की और कतर भी मध्यस्थता कर रहे हैं. पाकिस्तानी अधिकारियों ने ही ईरान का प्रस्ताव व्हाइट हाउस तक पहुंचाया है. ईरान का मानना है कि पहले समुद्री मार्ग खोलकर आर्थिक नुकसान रोकना जरूरी है. वहीं अमेरिका परमाणु सुरक्षा की गारंटी के बिना कोई छूट देने को तैयार नहीं दिख रहा. दोनों पक्ष अभी ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं.

होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु तनाव

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण रास्ता है. इसे खोलने से ईरान को आर्थिक राहत मिलेगी, लेकिन अमेरिका को डर है कि इससे ईरान परमाणु कार्यक्रम पर रियायत देने से बच सकता है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान का ऑयल सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. अब सबकी नजरें ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हुई हैं.