Iran-Israel Tensions: कभी भी तबाह हो सकता है ईरान का 'फोर्ड़ो परमाणु संयंत्र', अमेरिका ने व्हाइटमैन एयरबेस से रवाना किया ईरान का काल
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स को हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया एयरबेस के लिए रवाना कर दिया है.
US b-2 bombers Diego Garcia: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स को हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया एयरबेस के लिए रवाना कर दिया है. इस मिशन में बी-2 बॉम्बर्स के साथ आठ KC-135 टैंकर विमान भी शामिल हैं, जो हवा में ईंधन भरने की सुविधा देंगे. यह कदम सामान्य सैन्य रोटेशन से अलग एक रणनीतिक संदेश है. सूत्रों के मुताबिक, इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य ईरान के सबसे सुरक्षित परमाणु स्थल, फोर्डो यूरेनियम संवर्धन केंद्र को निशाना बनाना हो सकता है.
फोर्डो न्यूक्लियर सेंटर, ईरान के सबसे सुरक्षित परमाणु ठिकानों में से एक है, जिसे "परमाणु किला" के रूप में जाना जाता है. यह पहाड़ी क्षेत्र में, जमीन से लगभग 90 मीटर नीचे, सुरंगों और चट्टानों के बीच निर्मित है. इसकी संरचना इतनी मजबूत है कि इसे पारंपरिक बमों से नष्ट करना लगभग असंभव है. विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अमेरिका का मासिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) बम ही इस ठिकाने को तबाह कर सकता है. इस बम को बी-2 या बी-52 बॉम्बर्स द्वारा गिराया जा सकता है, लेकिन बी-52 में स्टील्थ तकनीक की कमी के कारण इसे ईरानी वायु रक्षा प्रणाली द्वारा ट्रैक किया जा सकता है. दूसरी ओर, बी-2 की स्टील्थ क्षमता इसे रडार से बचाने में सक्षम बनाती है, जिसके कारण इसे इस मिशन के लिए चुना गया है.
बी-2 बॉम्बर: अमेरिका का घातक हथियार
बी-2 स्पिरिट अमेरिकी वायुसेना का सबसे उन्नत और घातक रणनीतिक बॉम्बर है, जिसे विशेष रूप से गहरी मारक क्षमता और दुश्मन की वायु रक्षा को भेदने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसकी स्टील्थ तकनीक इसे रडार की नजरों से बचाती है, जिससे यह दुनिया के सबसे सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है. यह 30,000 पाउंड वजनी MOP बम ले जाने में सक्षम है, जो भूमिगत ठिकानों को भी नष्ट कर सकता है. बी-2 की उड़ान रेंज लगभग 9,600 किलोमीटर है, जो इसे बिना ईंधन भरे लंबी दूरी के मिशनों को अंजाम देने में सक्षम बनाती है. यही कारण है कि इसे 21वीं सदी का सबसे विश्वसनीय और घातक रणनीतिक हथियार माना जाता है.
डिएगो गार्सिया को ही क्यों चुना?
बता दें डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी में बना हुआ एक महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकाना है. यह द्वीप फारस की खाड़ी, पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के बीच रणनीतिक रूप से स्थित है. इस अड्डे से बी-2 जैसे लंबी दूरी के विमानों को बिना किसी ओवरफ्लाइट प्रतिबंध के लक्ष्यों पर हमला करने के लिए भेजा जा सकता है. अमेरिका ने इराक, अफगानिस्तान और लीबिया जैसे अभियानों में इस एयरबेस का उपयोग किया है. डिएगो गार्सिया पर बी-2 की तैनाती एक संवेदनशील और रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जो ईरान-इजरायल संघर्ष के संदर्भ में अमेरिका की तैयारियों को दर्शाता है.
अमेरिका की रणनीति और ट्रंप का फैसला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले की अनुमति दे दी है, हालांकि उन्होंने अभी कुछ समय के लिए ठहरने का निर्देश दिया है. बी-2 बॉम्बर्स की तैनाती को अमेरिका की वैश्विक रणनीतिक पुनर्संरचना का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य इजरायल-ईरान तनाव में सहयोगियों को आश्वस्त करना और संभावित संघर्षों में लचीलापन देना है. पेंटागन ने बार-बार साफ़ किया है कि बी-2 जैसे विमानों की तैनाती सहयोगियों को सुरक्षा का भरोसा देने और रणनीतिक विकल्पों को तैयार रखने के लिए की जाती है.