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भारतीय मूल के शख्स ने मूनलाइटिंग से अमेरिका में कमाए 40 लाख, अब हो सकती है 15 साल की जेल

39 वर्षीय भारतीय मूल के न्यूयॉर्क निवासी मेहुल गोस्वामी को अमेरिकी प्रशासन ने “ग्रैंड लार्सेनी” के आरोप में गिरफ्तार किया है.

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Sagar Bhardwaj

न्यूयॉर्क में रहने वाले भारतीय मूल के मेहुल गोस्वामी उस समय सुर्खियों में आए, जब उन पर सरकारी नौकरी के साथ-साथ निजी कंपनी में काम करने का आरोप लगा. 39 वर्षीय गोस्वामी ने कथित तौर पर न्यूयॉर्क स्टेट ऑफिस में रिमोट काम करते हुए सेमीकंडक्टर कंपनी ग्लोबलफाउंड्रीज में कॉन्ट्रैक्टर के रूप में काम शुरू किया. इस दोहरे काम से उन्होंने लाखों रुपये कमाए, लेकिन अब उन्हें 15 साल तक की जेल का सामना करना पड़ सकता है. 

सरकारी नौकरी पर रहते की मूनलाइटिंग

न्यूयॉर्क स्टेट इंस्पेक्टर जनरल और सरटोगा काउंटी शेरिफ कार्यालय की जांच में पता चला कि गोस्वामी ने मार्च 2022 से ग्लोबलफाउंड्रीज में काम शुरू किया, जबकि उनकी सरकारी नौकरी चल रही थी. एक गुमनाम ईमेल ने इस जांच को शुरू किया, जिसमें दावा किया गया कि गोस्वामी सरकारी काम के घंटों में निजी कंपनी के लिए काम कर रहे थे.

करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग

इंस्पेक्टर जनरल लूसी लैंग ने कहा, “सार्वजनिक कर्मचारियों से ईमानदारी की उम्मीद की जाती है. गोस्वामी का कथित व्यवहार करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग है.” जांच में पाया गया कि गोस्वामी ने 50,000 डॉलर (लगभग 40 लाख रुपये) के बराबर सरकारी संसाधनों का गलत इस्तेमाल किया. 

15 साल की हो सकती है जेल

15 अक्टूबर को गोस्वामी को “ग्रैंड लार्सेनी” के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जो न्यूयॉर्क में गंभीर अपराध है. इस अपराध की अधिकतम सजा 15 साल की जेल है. माल्टा टाउन कोर्ट में जज जेम्स ए फाउसी के सामने पेशी के बाद उन्हें जमानत के बिना रिहा किया गया, क्योंकि न्यूयॉर्क कानून के तहत यह अपराध जमानत के लिए योग्य नहीं है.

क्या होती है मूनलाइटिंग

मूनलाइटिंग तब होती है, जब कोई कर्मचारी अपनी मुख्य नौकरी के अलावा दूसरी नौकरी या प्रोजेक्ट करता है, खासकर तब जब यह काम उसी समय में किया जाए, जो मुख्य नौकरी के लिए तय है. यह अक्सर रात के समय या छिपकर किया जाता है, इसलिए इसे ‘मूनलाइटिंग’ (चांदनी में काम) कहा जाता है. उदाहरण के लिए, गोस्वामी ने सरकारी नौकरी के घंटों में ग्लोबलफाउंड्रीज के लिए काम किया.