बांग्लादेश में चुनाव से 48 घंटे पहले हिंदू कारोबारी की नृशंस हत्या, कट्टरपथियों ने दुकान में बंद कर किए चाकू से ताबड़तोड़ वार

बांग्लादेश के मैमनसिंह में चुनावी हलचल के बीच एक हिंदू व्यापारी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई. सुशेन चंद्र सरकार की मौत ने देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: बांग्लादेश में संसदीय चुनावों से ठीक पहले हिंसा का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा मामला मैमनसिंह जिले का है, जहाँ सोमवार रात एक हिंदू व्यवसायी की उसकी दुकान के भीतर हत्या कर दी गई. सुशेन चंद्र सरकार की इस मौत ने स्थानीय समुदाय में खौफ भर दिया है. पुलिस अब वारदात की असली वजह तलाशने में जुटी है. बढ़ती भीड़ हिंसा और हमलों ने देश के माहौल को पहले ही काफी संवेदनशील और तनावपूर्ण बना दिया है.

सुशेन चंद्र सरकार त्रिशाल उपजिला के बोगर बाजार में 'मैसर्स भाई भाई एंटरप्राइज' नाम की चावल की दुकान चलाते थे. सोमवार रात करीब 11:00 बजे जब वह दुकान के अंदर थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियारों से उन पर हमला कर दिया. हत्या के बाद अपराधियों ने शव को अंदर ही छोड़ दिया और दुकान का शटर नीचे गिराकर फरार हो गए. पुलिस अब इस जघन्य हत्याकांड की हर एंगल से बारीकी से जांच कर रही है.

अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले 

बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों का सिलसिला थमा नहीं है. इसकी शुरुआत कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हुई थी. 18 दिसंबर को भी दीपू चंद्र दास नाम के एक कर्मचारी की भीड़ ने हत्या कर दी थी और ईशनिंदा के आरोप में उसे आग लगा दी गई थी. ये घटनाएं दर्शाती हैं कि देश में किस कदर अराजकता फैली हुई है और निर्दोष लोग कट्टरपंथ का शिकार हो रहे हैं.

मॉब लिंचिंग और अराजकता 

राजबाड़ी जिले में भी अमृत मंडल नाम के व्यक्ति की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. यद्यपि पुलिस ने उसे अपराधी बताया, लेकिन सड़कों पर भीड़ द्वारा न्याय करना खतरनाक प्रवृत्ति बन गई है. पिछले साल कालीगंज में हिंदू व्यापारी लिटन चंद्र दास भी ऐसी ही भीड़ की हिंसा का शिकार हुए थे. स्थानीय नागरिक अब अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं, क्योंकि अपराधियों में कानून का कोई डर दिखाई नहीं दे रहा है.

अन्य वारदातों से बढ़ा तनाव 

हिंसा का यह दौर केवल धार्मिक या राजनीतिक विवादों तक सीमित नहीं है. हाल ही में पेट्रोल पंप पर काम करने वाले रिपन साहा की भी मौत हुई, जब उन्होंने भुगतान किए बिना भाग रहे एक वाहन को रोकने की कोशिश की थी. देश के विभिन्न हिस्सों से आ रही ऐसी खबरें चुनाव से पहले नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ा रही हैं. प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद अल्पसंख्यक समुदायों के बीच असुरक्षा की भावना गहरी होती जा रही है.