मुश्किल में फंसे ट्रंप! ताइवान के मुद्दे पर चीन ने घेरा, अब क्या होगा अमेरिकी राष्ट्रपति का अगला कदम?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस वक्त चीन की दो-दिवसीय यात्रा पर हैं. दोनों देशों के बीच शुरू में काफी उत्साह देखने को मिला था लेकिन अब शी जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे पर चेतावनी दे दी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस वक्त चीन की दो-दिवसीय यात्रा पर निकले हैं. उनकी यात्रा के शुरुआती चरण में दोनों देशों की ओर से काफी मधुर बोल सुनने को मिले. हालांकि जैसे-जैसे दोनों नेताओं के बीच बातचीत बढ़ रही है, वैसे-वैसे मुद्दा गरमाता नजर आ रहा है. चीनी मीडिया के मुताबिक राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति को ताइवान के मुद्दे पर चेतावनी दी है.
जिनपिंग ने कहा कि अगर ताइवान के मुद्दे को सही ढंग नहीं संभाला गया तो दुनिया के दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में टकराव आ सकता है. उन्होंने ताइवान स्ट्रेट के मुद्दे को इस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया और कहा कि अगर इस मुद्दे को ठीक से नहीं संभाला गया तो संघर्ष तेज हो सकते हैं.
ताइवान के मुद्दे पर चीन की चेतावनी
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने देश में अमेरिकी राष्ट्रपति का सम्मानपूर्वक स्वागत किया. हालांकि दोनों के बीच जब बात शुरू हुई तो माहौल थोड़ा बदल गया. चीनी प्रसारक के मुताबिक जिनपिंग ने चीन-अमेरिका रिश्ते में ताइवान को सबसे अहम मुद्दा बताया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध तभी स्थिर रह सकते हैं जब इस मुद्दे को ठीक से संभाल लिया जाए. अगर हम ऐसा करने में फेल होते हैं तो दोनों देशों के बीच खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो सकती है. जिनपिंग द्वारा अमेरिका के लिए यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब ताइवान की ओर से यह कहा गया था कि इस मुद्दे पर अमेरिका उसके साथ है. शी जिनपिंग ने साफ कहा कि ताइवान स्ट्रेट में शांति ही चीन और अमेरिका के बीच शांति का सबसे बड़ा आधार है.
क्या है पूरा विवाद?
बता दें कि चीन के लिए ताइवान का मुद्दा शुरु से सबसे अहम रहा है. क्योंकि ताइवान खुद को एक स्व-शासित लोकतंत्र मानता है, वहीं चीन उसे अपने क्षेत्र का हिस्सा बताता है. चीन की ओर से कई बार ताइवान पर बलपूर्वक कब्जे की संभावना जताई गई है. कुछ सालों के अंदर चीन की ओर से ताइवान के आसपास में सैन्य अभ्यास भी तेज कर दिए गए हैं. जिसके कारण ताइवान का मुद्दा एक बार फिर से चर्चे में है.
हालांकि ट्रंप ने इस मुद्दे पर हमेशा से ताइवान का समर्थन किया है. उन्होंने पिछले साल ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज की भी मंजूरी दी थी. लेकिन उसे अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है. अब ऐसे में यह सवाल उठता है कि अगर अमेरिका-चीन के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाता है तो ताइवान द्वारा किए गए वादों को क्या होगा? ताइवान को दुनिया का सबसे अग्रणी चिप निर्माता कहा जाता है जो आने वाले समय में AI के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है. इसी वजह से चीन हमेशा से ताइवान पर अपने दबदबे को बढ़ाने की कोशिश करता है.