'समझौता नहीं हुआ तो टोल हम वसूलेंगे...', होर्मुज को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के नए बयान ने बढ़ाई हलचल

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि 60 दिनों में ईरान के साथ अंतिम शांति समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगा सकता है.

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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक नए बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ट्रंप ने कहा है कि यदि अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के साथ स्थायी शांति समझौता नहीं हो पाता है, तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने पर विचार कर सकता है. यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ट्रंप पहले इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पूरी तरह मुक्त रखने की वकालत करते रहे हैं.

कैंप डेविड से जारी बयान में ट्रंप ने कहा कि फिलहाल अगले 60 दिनों तक किसी भी जहाज से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता नहीं हो पाया, तो अमेरिका समुद्री सुरक्षा पर होने वाले खर्च की भरपाई के लिए शुल्क वसूलने का विकल्प अपना सकता है. ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी नौसेना लंबे समय से पश्चिम एशिया क्षेत्र में सुरक्षा प्रदान कर रही है और इसके लिए संसाधनों का बड़ा उपयोग होता है.

बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

इस बीच स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की महत्वपूर्ण वार्ता शुरू होने जा रही है. इस बैठक में कई प्रमुख प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है. बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी. पाकिस्तान और कतर इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं.

वार्ता शुरू होने से पहले ईरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है. तेहरान का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल ने हाल के समझौते की कुछ शर्तों का पालन नहीं किया है. ईरान विशेष रूप से लेबनान में इजरायली सैन्य गतिविधियों को लेकर आपत्ति जता रहा है और इसे समझौते का उल्लंघन बता रहा है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड का क्या है कहना?

हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के इन आरोपों को खारिज कर दिया है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है और अमेरिकी नौसेना पूरे क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 60 दिन अमेरिका और ईरान के संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं. यदि बातचीत सफल होती है तो क्षेत्र में स्थिरता बढ़ सकती है, लेकिन असफलता की स्थिति में समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बनी रहेगी.