अब होगा फाइनल फैसला! ईरान के साथ दूसरी राउंड बातचीत के लिए खुद ट्रंप जा सकते हैं इस्लामाबाद- रिपोर्ट
डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ प्रस्तावित वार्ता में शामिल हो सकते हैं, जो इस्लामाबाद में होने वाली है. युद्धविराम खत्म होने से पहले दोनों देश बातचीत की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं.
नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ प्रस्तावित शांति वार्ता में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक यह बातचीत इस्लामाबाद में होने वाली है और ट्रंप इसमें व्यक्तिगत रूप से या वर्चुअल माध्यम से शामिल हो सकते हैं, खासकर अगर कोई समझौता होने की स्थिति बनती है.
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर तैयारियां जारी हैं और दोनों देशों के बीच चल रहा दो सप्ताह का युद्धविराम बुधवार को समाप्त होने वाला है. ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि इस युद्धविराम को आगे बढ़ाने की संभावना बेहद कम है. ऐसे में यह वार्ता बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे आगे के रिश्तों और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है.
क्यों बढ़ा फिर से तनाव?
सूत्रों के अनुसार बातचीत निर्धारित समय पर होने की दिशा में आगे बढ़ रही है. हालांकि हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी झंडे वाले जहाज को अमेरिका द्वारा जब्त किए जाने के बाद तनाव बढ़ गया है. इस घटना के चलते ईरान ने पहले वार्ता में शामिल होने से इनकार करने के संकेत दिए थे.
इसके बावजूद ताजा जानकारी के अनुसार ईरान अब इस वार्ता में भाग लेने पर सकारात्मक रूप से विचार कर रहा है. एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन बातचीत के लिए दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं.
समझौते को लेकर क्या हैं चुनौतियां?
दोनों देशों के बीच इस संभावित समझौते को लेकर कई चुनौतियां भी सामने हैं. अमेरिका चाहता है कि ऐसा कोई समझौता हो जिससे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक बाजार में अस्थिरता को रोका जा सके. साथ ही अमेरिका की मांग है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं मिलनी चाहिए.
क्या चाहता है ईरान?
वहीं ईरान की कोशिश है कि वह इस वार्ता के जरिए अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों में राहत हासिल करे और किसी भी संभावित युद्ध को टाल सके. साथ ही वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी तरह की पाबंदी नहीं चाहता. ईरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण एक महत्वपूर्ण रणनीतिक ताकत माना जाता है, जिसे वह बातचीत में उपयोग करना चाहता है.
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