T20 World Cup 2026

दावोस में कनाडा के पीएम के भाषण ने मचाई हलचल, ट्रंप पर साधा निशाना, भारत को लेकर कही ये बात

मार्क कार्नी ने कहा कि अब हालात ऐसे बन रहे हैं जहां ताकतवर देश अपनी ताकत के दम पर फैसले थोप रहे हैं और कमजोर देशों को नुकसान उठाना पड़ रहा है.

@ErikSolheim
Sagar Bhardwaj

विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दावोस सम्मेलन में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वैश्विक राजनीति पर बड़ा और सख्त बयान दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाली पुरानी विश्व व्यवस्था अब सिर्फ बदल नहीं रही, बल्कि टूट रही है. अपने भाषण में उन्होंने भारत समेत “मिडिल पावर” देशों से एकजुट होने की अपील की.

दुनिया एक बड़े मोड़ पर

मार्क कार्नी ने कहा कि दुनिया एक बड़े मोड़ पर खड़ी है. उन्होंने आगे कहा, “हम किसी ट्रांजिशन में नहीं, बल्कि एक टूटन के दौर में हैं.” उन्होंने बताया कि दशकों से चल रही नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कमजोर हो रही है और उसकी जगह ताकतवर देशों की प्रतिस्पर्धा ले रही है.

ताकतवर बनाम कमजोर देश

कार्नी ने बिना नाम लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अब हालात ऐसे बन रहे हैं जहां ताकतवर देश अपनी ताकत के दम पर फैसले थोप रहे हैं और कमजोर देशों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. टैरिफ, सप्लाई चेन और फाइनेंशियल सिस्टम को दबाव बनाने के हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.

झुकने से सुरक्षा नहीं मिलेगी

कनाडाई प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि छोटे और मध्यम देश यह मानकर न चलें कि बड़े देशों की हर बात मान लेने से वे सुरक्षित रहेंगे. उन्होंने साफ कहा कि “सिर्फ साथ चलने से सुरक्षा नहीं मिलती.” उनका कहना था कि अगर मिडिल पावर देश एकजुट नहीं हुए, तो फैसले उनकी मौजूदगी के बिना होंगे.

भारत का खास जिक्र

मार्क कार्नी ने भारत को अपनी रणनीति में अहम बताया. उन्होंने कहा कि कनाडा, भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत कर रहा है. इसका मकसद अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता को कम करना है. इसके अलावा कनाडा ASEAN देशों, थाईलैंड, फिलीपींस और मर्कोसुर समूह के साथ भी व्यापार समझौतों पर काम कर रहा है.

अलग-अलग मुद्दों पर अलग गठबंधन

कार्नी ने “वैरिएबल जियोमेट्री” की बात करते हुए कहा कि अब एक ही गठबंधन हर मुद्दे के लिए काफी नहीं होगा. डिफेंस, ट्रेड, टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और क्लाइमेट जैसे मुद्दों पर अलग-अलग देशों को साथ आना होगा.

सुरक्षा और नाटो पर रुख

सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने ग्रीनलैंड और डेनमार्क के समर्थन की बात दोहराई और कहा कि नाटो के आर्टिकल-5 के प्रति कनाडा की प्रतिबद्धता अटल है. कुल मिलाकर, दावोस में कार्नी का भाषण मौजूदा वैश्विक राजनीति को लेकर एक कड़ा संदेश और भारत जैसे देशों के लिए अहम संकेत माना जा रहा है.